Last Updated May - 17 - 2025, 12:47 PM | Source : Fela News
संस्कृत भाषा के विद्वान और तुलसी पीठ के संस्थापक रामभद्राचार्य को वर्ष 2023 का प्रतिष्ठित ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया।
यह सम्मान उन्हें नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा सौंपा गया।
पुरस्कार प्राप्त करने के बाद रामभद्राचार्य ने राष्ट्रपति मुर्मू को 'छोटी बहन' कहकर संबोधित किया, जिससे माहौल भावुक और आत्मीय हो गया।उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति को यह सम्मान प्रदान करते देखना उनके लिए सौभाग्य की बात है।
रामभद्राचार्य न केवल एक आध्यात्मिक गुरु हैं, बल्कि उन्होंने संस्कृत साहित्य में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उन्होंने अनेक ग्रंथों की रचना की है और दिव्यांगों के लिए शिक्षा एवं सेवा के क्षेत्र में विशेष कार्य किए हैं।
ज्ञानपीठ पुरस्कार भारत का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान है, जो हर वर्ष देश के किसी एक विशिष्ट साहित्यकार को प्रदान किया जाता है।
रामभद्राचार्य का यह सम्मान भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देने जैसा है।