Last Updated Feb - 11 - 2026, 05:17 PM | Source : Fela News
राजपाल यादव को 1.11 करोड़ की आर्थिक मदद देने वाले, राव इंद्रजीत सिंह की आपराधिक मामलों से जुड़ी पृष्ठभूमि चर्चा में
फिल्म अभिनेता राजपाल यादव को आर्थिक सहायता देने के बाद राव इंद्रजीत सिंह चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने राजपाल यादव की कानूनी और वित्तीय परेशानियों के बीच 1.11 करोड़ रुपये की मदद देने की घोषणा की है, जिसके बाद उनके व्यक्तित्व और पृष्ठभूमि को लेकर कई जानकारियां सामने आई हैं।
बताया जा रहा है कि राव इंद्रजीत सिंह म्यूजिक प्रोडक्शन और डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े हैं तथा ‘जेम ट्यून्स’ नामक म्यूजिक लेबल के संस्थापक हैं। क्षेत्रीय संगीत इंडस्ट्री में उनकी पहचान एक प्रोड्यूसर और कारोबारी के तौर पर रही है। राजपाल यादव की आर्थिक स्थिति सामने आने के बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से सहायता देने का ऐलान किया और अन्य लोगों से भी आगे आने की अपील की।
हालांकि, इस बीच उनके नाम से जुड़े आपराधिक मामलों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, राव इंद्रजीत सिंह पर अतीत में हत्या, उगाही, धोखाधड़ी और जबरन वसूली जैसे गंभीर आरोप लग चुके हैं। जांच एजेंसियों की कार्रवाई में उनका नाम कथित तौर पर निजी वित्तीय विवादों और जबरन समझौतों से जुड़े मामलों में भी सामने आया है।
रिपोर्ट के अनुसार, उन पर आरोप है कि उन्होंने निजी ऋण विवादों के निपटारे में दबाव और धमकी के जरिए समझौते करवाए। प्रवर्तन एजेंसियों ने ऐसे मामलों में कथित आपराधिक नेटवर्क और संगठित गिरोहों से संबंधों की भी जांच की थी। यह भी कहा गया कि इन गतिविधियों से अर्जित धन का उपयोग संपत्तियां और लग्जरी जीवनशैली बनाए रखने में किया गया।
वहीं दूसरी ओर, राजपाल यादव की मदद को लेकर उन्होंने इसे कलाकार के समर्थन का कदम बताया। बताया जा रहा है कि उन्होंने अभिनेता के परिजनों से संपर्क कर आर्थिक सहयोग की प्रक्रिया शुरू की और जरूरत पड़ने पर शेष राशि स्वयं जमा कराने की बात भी कही।
इस बीच, फिल्म इंडस्ट्री और अन्य लोगों की ओर से भी राजपाल यादव के समर्थन में आर्थिक मदद की घोषणाएं की गई हैं। हालांकि राव इंद्रजीत सिंह का नाम सबसे बड़ी राशि देने वालों में शामिल होने के कारण प्रमुखता से सुर्खियों में बना हुआ है।
फिलहाल, एक ओर जहां उनकी आर्थिक सहायता की सराहना की जा रही है, वहीं दूसरी ओर उनके आपराधिक आरोपों से जुड़े रिकॉर्ड को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। मामले को लेकर आधिकारिक एजेंसियों की पूर्व जांच और आरोपों का संदर्भ चर्चा का विषय बना हुआ है।
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