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येलगिरी की पहाड़ियों में मिला निओलिथिक युग का अद्भुत गुफा चित्रकला स्थल

येलगिरी की पहाड़ियों में मिला निओलिथिक युग का अद्भुत गुफा चित्रकला स्थल

Last Updated Jun - 26 - 2025, 02:41 PM | Source : Fela News

तमिलनाडु की येलगिरी पहाड़ियों में निओलिथिक युग का एक अद्भुत गुफा चित्रकला स्थल खोजा गया है, जो प्राचीन मानव सभ्यता और कला का अनमोल प्रमाण है।
येलगिरी की पहाड़ियों में मिला निओलिथिक युग का अद्भुत गुफा चित्रकला स्थल
येलगिरी की पहाड़ियों में मिला निओलिथिक युग का अद्भुत गुफा चित्रकला स्थल

तमिलनाडु की येलगिरी पहाड़ियों में एक प्राचीन गुफा में मिली रहस्यमयी चित्रकला ने पुरातत्व जगत में हलचल मचा दी है। यह खोज रेड्डीयूर इलाके की एक प्राकृतिक गुफा में स्थानीय लोगों द्वारा की गई, जिन्होंने अनोखे चिन्हों के बारे में सेक्रेड हार्ट कॉलेज के विशेषज्ञों को सूचित किया।

कॉलेज के इतिहास विभाग के प्रमुख और ख्यात इतिहासकार प्रोफेसर प्रभु, जिला वन विभाग के अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे और उन्होंने इस खोज को अत्यंत असाधारण बताया। उनका कहना है कि यह गुफा समुद्र तल से लगभग 1,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और इसमें पाए गए चित्र निओलिथिक युग से मिलते-जुलते हैं, जो लगभग 10,000 से 3,000 ईसा पूर्व के बीच के हो सकते हैं।

गुफा का क्षेत्रफल लगभग 100 वर्ग मीटर है और इसमें करीब 80 चित्र हैं—मानव और पशु आकृतियाँ, जिनमें लोग जानवरों की पीठ पर बैठे, नृत्य करते, लड़ते और जश्न मनाते हुए दर्शाए गए हैं। चित्रों में प्रयोग किया गया रहस्यमयी सफेद रंग हज़ारों वर्षों के बाद भी सुरक्षित है, जो इसकी ऐतिहासिक और वैज्ञानिक महत्ता को और बढ़ा देता है।

प्रोफेसर प्रभु ने बताया कि यह गुफा लगभग 50 लोगों को आश्रय देने लायक है, जिससे माना जा रहा है कि यह किसी शिकारी-समूह का निवास स्थल रहा होगा। साथ ही, चित्रों की प्रकृति और गुफा की ऊँचाई इस बात की ओर इशारा करती है कि यह स्थल पूजा और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए भी प्रयोग में लाया जाता था।

हालांकि, प्रोफेसर प्रभु ने चिंता जताई कि हाल ही में कुछ आगंतुकों द्वारा इन चित्रों को क्षति पहुंचाई गई है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि इस अनमोल विरासत को बचाने और संरक्षित करने के लिए तुरंत सुरक्षा कदम उठाए जाएं।

यह खोज न केवल जिलास्तर पर पहली बार इस तरह की महत्वपूर्ण गुफा चित्रकला के रूप में सामने आई है, बल्कि यह दक्षिण भारत के प्रागैतिहासिक समाज और संस्कृति को समझने की दिशा में एक नई रोशनी भी डाल सकती है। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि यह स्थल आने वाले समय में और अधिक अनुसंधान और संरक्षण प्रयासों का केंद्र बनेगा।

 

 

 

 

 

 

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