Last Updated Jan - 13 - 2026, 12:35 PM | Source : Fela News
बीएमसी चुनाव से ठीक पहले तमिलनाडु बीजेपी नेता अन्नामलाई के मुंबई वाले बयान ने राजनीति गरमा दी, फडणवीस ने बचाव किया तो राज ठाकरे हमलावर हो गए।
मुंबई महानगरपालिका यानी BMC चुनाव से पहले सियासी माहौल उस वक्त अचानक गरमा गया, जब तमिलनाडु बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई के एक बयान ने विवाद खड़ा कर दिया। चुनाव प्रचार अपने अंतिम चरण में है और 15 जनवरी को मतदान होना है, ऐसे में इस बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी है। विपक्षी दलों ने इसे मुंबई और महाराष्ट्र की अस्मिता से जोड़ते हुए मुद्दा बना लिया, जबकि बीजेपी को सफाई देनी पड़ गई।
दरअसल, अन्नामलाई ने एक कार्यक्रम के दौरान मुंबई को लेकर ऐसा बयान दे दिया, जिसे लेकर यह आरोप लगने लगे कि बीजेपी मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की सोच रखती है। बयान सामने आते ही राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। खासतौर पर मराठी अस्मिता के मुद्दे पर सक्रिय दलों ने इस पर तीखा हमला बोला। चुनावी माहौल में यह मुद्दा इसलिए भी संवेदनशील हो गया क्योंकि बीएमसी चुनाव को मुंबई की सत्ता की लड़ाई माना जाता है।
विवाद बढ़ता देख महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सामने आकर सफाई देनी पड़ी। उन्होंने कहा कि अन्नामलाई के बयान को गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए। फडणवीस ने यह भी कहा कि अन्नामलाई को हिंदी भाषा पर पूरी पकड़ नहीं है, इसलिए उनके शब्दों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के इस बयान को बीजेपी की ओर से डैमेज
कंट्रोल के तौर पर देखा जा रहा है, ताकि चुनाव से पहले कोई बड़ा नुकसान न हो।
दूसरी ओर, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने इस मुद्दे को हाथोंहाथ लिया और बीजेपी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी बार-बार मुंबई को लेकर ऐसे बयान दिलवाकर माहौल खराब करना चाहती है। राज ठाकरे ने कहा कि मुंबई महाराष्ट्र की आत्मा है और इस पर किसी भी तरह का सवाल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने इसे मराठी मान-सम्मान से जोड़ते हुए चुनावी मुद्दा बना दिया।
इस पूरे विवाद के बीच बीएमसी चुनाव और भी दिलचस्प हो गए हैं। लंबे समय बाद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का एक साथ आना पहले ही बीजेपी के लिए चुनौती बना हुआ है। अब अन्नामलाई के बयान ने विपक्ष को एक और मौका दे दिया है कि वह बीजेपी को घेर सके। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मुद्दा चुनावी सभाओं और रैलियों में जोर-शोर से उठेगा।
कुल मिलाकर, बीएमसी चुनाव से ठीक पहले उठा यह विवाद दिखाता है कि मुंबई की राजनीति में एक बयान भी बड़ा सियासी तूफान खड़ा कर सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि मतदाता इस विवाद को किस नजर से देखते हैं और इसका चुनावी नतीजों पर कितना असर पड़ता है।