Last Updated Sep - 29 - 2025, 04:31 PM | Source : Fela News
बाबा जेल की सलाखों के पीछे हैं, लेकिन उनके अनुयायियों की बड़ी संख्या और पुराना प्रभाव अभी भी लोगों को डराता है। यही वजह है कि उनके खिलाफ बोलने से लोग कतराते हैं
दिल्ली में स्वामी चैतन्यानंद के खिलाफ चल रहे यौन उत्पीड़न और धोखाधड़ी के मामले ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं। स्वामी अब सलाखों के पीछे हैं, लेकिन इससे छात्राओं का डर कम नहीं हुआ है। कई छात्राओं ने बताया कि उनके लिए यह सिर्फ एक जीत नहीं, बल्कि अभी आधी जंग बाकी है।
पीड़ित छात्राओं का कहना है कि स्वामी की मानसिक और भावनात्मक छेड़छाड़ ने उन्हें लंबे समय तक डर और असुरक्षा में रखा। पुलिस ने मामले में कार्रवाई की है और आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, लेकिन छात्राओं का कहना है कि न्याय प्रक्रिया लंबी और थकाऊ है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि ऐसे मामलों में सलाखों के पीछे होना सिर्फ पहला कदम है, असली लड़ाई समाज की मानसिकता और सुरक्षित माहौल बनाने की होती है। छात्राएं अब भी सतर्क हैं और चाहती हैं कि सिस्टम उन्हें पूरी सुरक्षा और न्याय दिलाए।
यह मामला याद दिलाता है कि यौन उत्पीड़न और धोखाधड़ी के खिलाफ लड़ाई केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज और सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।