Last Updated Dec - 08 - 2025, 03:07 PM | Source : Fela News
गुलदस्तों की जगह फल-टोकरी—खर्च दिखावे से हटाकर बच्चों के पोषण की ओर बढ़ता संदेश।
₹500-1000 के गुलदस्ते की जगह फल-टोकरी, धर्मेंद्र प्रधान की अगुवाई में एक नया संदेश: दिखावे से बेहतर है बच्चों के पोषण और असल काम पर खर्च।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि अक्सर कार्यक्रमों में स्वागत के लिए दिए जाने वाले 500-1000 रुपये के गुलदस्तों की उम्र सिर्फ 20 सेकंड की होती है, फोटो खिंचने तक। वहीं, उन्हीं पैसों में 2 किलो सेब खरीदकर बच्चों को खिलाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि मध्य-प्रदेश के करीब डेढ़ करोड़ विद्यार्थी में से लगभग 50 लाख ऐसे होंगे जिन्होंने पाँचवीं क्लास तक सेब नहीं देखा होगा, खाने का मौका शायद उन्हें कभी न मिला हो। अंजीर, दूध या अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों की कमी, बच्चों के पोषण-अभाव की ओर ध्यान खींचती है।
प्रधान ने, मंच पर मौजूद नेताओं से अपील करते हुए कहा कि आने वाले समारोहों में गुलदस्तों की जगह फल-टोकरियाँ या पौष्टिक सामग्री चुनें। इससे न सिर्फ दिखावा कम होगा, बल्कि बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य में सुधार होगा, और धन का उपयोग सार्थक तरीके से होगा।
दरअसल यह सिर्फ प्रतीकात्मक बदलाव नहीं, बल्कि एक सामाजिक सोच को बदलने की पहल है, जहां स्वागत-सम्मानों की बजाय मानव कल्याण और बच्चों की भलाई को तवज्जो दी जाए। अगर इसे लागू किया जाए, तो हजारों-लाखों रुपये जिस तरह फूलों पर उड़ जाते हैं, उन्हें दुरुपयोग से बचाया जा सकता है।
यह फैसला सिर्फ समारोहों पर खर्च बचाने का नहीं, देश के भविष्य, उसके बच्चों के पोषण और बेहतर कल की सोच को ध्यान में रखते हुए लिया जाना चाहिए.