Last Updated Feb - 02 - 2026, 03:13 PM | Source : Fela News
भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान चार दिवसीय दौरे पर आर्मेनिया पहुंचे हैं यह यात्रा ईरान से जुड़े क्षेत्रीय तनाव और रक्षा सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण
भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान का आर्मेनिया दौरा मौजूदा क्षेत्रीय हालात के बीच खास माना जा रहा है। जनरल चौहान चार दिनों की आधिकारिक यात्रा पर आर्मेनिया पहुंचे हैं, जहां वे रक्षा सहयोग और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर उच्चस्तरीय बातचीत करेंगे। आर्मेनिया ईरान का पड़ोसी देश है और ऐसे समय में यह दौरा हुआ है, जब पश्चिम एशिया और काकेशस क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव बना हुआ है।
सूत्रों के अनुसार, इस दौरे के दौरान जनरल अनिल चौहान आर्मेनिया के शीर्ष सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। बातचीत में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, सैन्य प्रशिक्षण, तकनीकी साझेदारी और क्षेत्रीय सुरक्षा हालात पर चर्चा होने की संभावना है। बताया जा रहा है कि भारत और आर्मेनिया के रिश्ते हाल के वर्षों में रक्षा क्षेत्र में मजबूत हुए हैं, खासकर हथियार और सैन्य उपकरणों की आपूर्ति को लेकर।
इस बीच, आर्मेनिया की भौगोलिक स्थिति को भी इस दौरे के संदर्भ में अहम माना जा रहा है। आर्मेनिया ईरान, तुर्किए और अजरबैजान जैसे संवेदनशील देशों के बीच स्थित है। ऐसे में भारत की ओर से इस स्तर का दौरा क्षेत्रीय संतुलन और रणनीतिक संवाद के रूप में देखा जा रहा है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या यह यात्रा केवल द्विपक्षीय सहयोग तक सीमित है या इसके व्यापक कूटनीतिक संकेत भी हैं।
वहीं दूसरी ओर, भारत की रक्षा नीति में हाल के वर्षों में मित्र देशों के साथ सैन्य सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि इस तरह के दौरे आपसी विश्वास बढ़ाने और साझा सुरक्षा हितों को समझने में मदद करते हैं। जनरल चौहान का यह दौरा उसी नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत भारत विभिन्न क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारियों को मजबूत कर रहा है।
बताया जा रहा है कि यात्रा के दौरान संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और रक्षा उत्पादन से जुड़े संभावित क्षेत्रों पर भी चर्चा हो सकती है। इसके अलावा क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर विचार-विमर्श एजेंडे का हिस्सा है।
फिलहाल इस दौरे पर अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों की भी नजर बनी हुई है। माना जा रहा है कि ईरान से जुड़े तनाव और बदलते वैश्विक हालात के बीच भारत का यह कदम उसके संतुलित और व्यावहारिक कूटनीतिक रुख को दर्शाता है। आने वाले दिनों में इस यात्रा के ठोस परिणामों पर सभी की नजर रहेगी।
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