Last Updated Apr - 03 - 2025, 12:32 PM | Source : Fela News
हैदराबाद के गाचीबौली में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण जंगलों का सफाया हो रहा है। विकास परियोजनाओं के चलते पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, जिससे वन्यजीवों का आ
आईटी हब बनाने की तैयारी, लेकिन पर्यावरण की कीमत पर?
हैदराबाद के आईटी कॉरिडोर में स्थित कंचा गाचीबौली गांव में सरकार द्वारा भूमि सफाई अभियान जोरों पर है। तेलंगाना सरकार ने इस भूमि को विकसित करने की योजना बनाई है, लेकिन इस फैसले का जोरदार विरोध हो रहा है। विश्वविद्यालय के छात्र और पर्यावरण प्रेमी इस क्षेत्र को राष्ट्रीय उद्यान घोषित करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकारी मशीनरी तेजी से जंगल को साफ करने में जुटी है।
क्या है पूरा मामला?
रंगारेड्डी जिले में स्थित कंचा गाचीबौली की 400 एकड़ भूमि को सरकार नीलाम करने की योजना बना रही है। सरकार का अनुमान है कि इस भूमि से 10,000 से 15,000 करोड़ रुपये की राजस्व प्राप्ति होगी। यहां आईटी पार्क, शहरी कनेक्टिविटी और बेहतर शहरी जीवन सुविधाओं का विकास किया जाएगा। लेकिन इस क्षेत्र की जैव विविधता को देखते हुए विरोध भी बढ़ रहा है।
पर्यावरण पर क्या पड़ेगा असर?
पर्यावरणविदों और छात्रों का दावा है कि इस क्षेत्र में 233 प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं, जो इसे एक समृद्ध जैव विविधता वाला क्षेत्र बनाते हैं। एक अध्ययन के अनुसार, जंगल के खत्म होने से स्थानीय जलवायु पर बड़ा असर पड़ेगा और तापमान में 1 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि हो सकती है। इसके अलावा, यहां की हरियाली खत्म होने से न केवल स्थानीय पर्यावरण बल्कि हैदराबाद के मौसम पर भी असर पड़ सकता है।
छात्रों का विरोध और पुलिस कार्रवाई
रविवार को इस भूमि सफाई अभियान के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे 50 से अधिक छात्रों को साइबराबाद पुलिस ने हिरासत में लिया। ये छात्र 2008-09 में वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (WWF)-इंडिया और हैदराबाद विश्वविद्यालय के संयुक्त अध्ययन का हवाला देकर कह रहे हैं कि यह क्षेत्र 455 से अधिक वनस्पतियों और जीवों की प्रजातियों का घर है।
सरकार बनाम पर्यावरण प्रेमी: समाधान क्या है?
सरकार अपने विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए इस भूमि पर निर्माण कार्य करना चाहती है, जबकि पर्यावरण प्रेमी इस क्षेत्र को संरक्षित करने की मांग कर रहे हैं। कोर्ट में इस मामले पर 7 अप्रैल को सुनवाई होनी है। अब देखना होगा कि सरकार और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन कैसे बनाया जाता है।
तेलंगाना सरकार का यह फैसला निश्चित रूप से आर्थिक रूप से फायदेमंद हो सकता है, लेकिन यह पर्यावरण के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। इस मुद्दे पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं कि क्या न्यायालय इस क्षेत्र को बचाने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगा या विकास की दौड़ में पर्यावरण फिर से पीछे छूट जाएगा।