Last Updated Jul - 26 - 2025, 11:24 AM | Source : Fela News
रेखा गुप्ता ने कहा कि हमारी सरकार ने इस मामले में कोर्ट में एक अर्जी दी है। उनका कहना है कि कोर्ट का फैसला गाड़ी की उम्र नहीं, उसकी फिटनेस के आधार पर होना चाहिए
दिल्ली और एनसीआर में 15 साल पुराने डीजल और 10 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर कोर्ट के प्रतिबंध को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदूषण कम करने की पूरी कोशिश कर रही है, लेकिन पहले की सरकारों ने इस पर ध्यान नहीं दिया, जिससे आज यह स्थिति बनी है और कोर्ट को सख्त फैसला लेना पड़ा।
रेखा गुप्ता ने कहा कि सिर्फ गाड़ियों की उम्र के आधार पर उन्हें बैन करना सही नहीं है। कोर्ट को इस फैसले पर दोबारा सोचना चाहिए। उन्होंने कहा, "अगर ऐसे ही फैसले होते रहे तो कल को ये भी कह सकते हैं कि कोई घर से बाहर ही न निकले।"
गाड़ियों की फिटनेस पर हो फैसला
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने कोर्ट में इस फैसले के खिलाफ एक अर्जी लगाई है। उनका कहना है कि गाड़ियों को उनकी फिटनेस के आधार पर देखा जाना चाहिए, न कि सिर्फ उम्र के आधार पर। उन्होंने कहा कि कई बुजुर्ग लोग अपनी गाड़ी बहुत कम इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अगर वह गाड़ी अच्छी हालत में है और प्रदूषण नहीं फैला रही, तो उसे जब्त करना गलत होगा।
सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार की मांग
दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से 2018 के फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि BS-6 मानक वाले वाहन पुराने BS-4 वाहनों की तुलना में बहुत कम प्रदूषण करते हैं। इसलिए केंद्र सरकार या वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग को यह निर्देश दिया जाए कि वह NCR में 10-15 साल पुराने वाहनों पर एक वैज्ञानिक और व्यापक स्टडी कराए।
सरकार का तर्क है कि सिर्फ उम्र के आधार पर गाड़ियों को सड़क से हटाना मध्यम वर्ग पर भारी पड़ता है, खासकर उन लोगों पर जिनकी गाड़ियां ठीक से चल रही हैं, कम इस्तेमाल होती हैं और प्रदूषण मानकों का पालन करती हैं। कुछ रिपोर्ट्स भी बताती हैं कि इन गाड़ियों का सालाना माइलेज कम होता है और कुल प्रदूषण में उनका योगदान बहुत कम है।