Last Updated Oct - 06 - 2025, 04:49 PM | Source : Fela News
छिंदवाड़ा कफ सिरप मामले में 40 साल से प्रैक्टिस कर रहे डॉ. प्रवीन सोनी को निलंबित करने के फैसले ने चिकित्सा समुदाय में गहरा गुस्सा पैदा कर दिया है।
छिंदवाड़ा कफ सिरप मामले में 40 साल से प्रैक्टिस कर रहे डॉ. प्रवीन सोनी को निलंबित करने के फैसले ने चिकित्सा समुदाय में गहरा गुस्सा पैदा कर दिया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने इसे डॉक्टर को बलि का बकरा बनाने वाला कदम बताया और सिरप बनाने वाली कंपनी को जिम्मेदार ठहराया।
IMA के नेताओं का कहना है कि डॉ. सोनी ने हमेशा अपने मरीजों का ध्यान रखा और सही इलाज के लिए प्रयासरत रहे। उन्होंने बताया कि सिरप से हुई मौत के मामले में दोष सीधे उस कंपनी पर है जिसने संदिग्ध दवा बनाई और बेची। डॉक्टर पर कार्रवाई करना पूरी तरह अनुचित और अन्यायपूर्ण है।
छिंदवाड़ा के स्वास्थ्य विभाग ने जांच के बाद डॉक्टर को निलंबित किया था। अधिकारी दावा कर रहे हैं कि इस मामले में डॉक्टर की जिम्मेदारी तय करनी जरूरी थी। लेकिन IMA का कहना है कि डॉक्टर केवल दवा लिखने के समय मरीज की हालत और उपलब्ध दवा पर भरोसा करते हैं। अगर दवा ही दोषपूर्ण है, तो उसका दोष डॉक्टर पर डालना सही नहीं है।
इस निलंबन के विरोध में कई डॉक्टरों और मेडिकल संस्थानों ने प्रदर्शन किया। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि मामले की सही जांच कंपनी और दवा पर केंद्रित हो, न कि डॉक्टर पर। IMA का कहना है कि यदि डॉक्टरों को इसी तरह दंडित किया गया, तो भविष्य में कोई भी डॉक्टर गंभीर मामलों में इलाज देने से डरने लगेगा।
यह विवाद न केवल छिंदवाड़ा के स्वास्थ्य तंत्र पर सवाल उठाता है, बल्कि पूरे देश में डॉक्टरों के हौसले और मरीजों की सुरक्षा के बीच संतुलन की आवश्यकता को भी उजागर करता है। डॉ. सोनी का मामला इस बात की याद दिलाता है कि जिम्मेदारी तय करने में सिर्फ सिस्टम की भूमिका नहीं, बल्कि सही जांच और न्याय भी जरूरी है।