Last Updated Nov - 13 - 2025, 06:03 PM | Source : Fela News
2002 से मेडिकल प्रैक्टिस कर रहे डॉक्टर शाहीन अब जांच के घेरे में हैं। उनके अस्पतालों और क्लीनिकों के नेटवर्क पर एजेंसियां नजर रखे हुए हैं, कई दस्तावेज जब्त हुए।
दिल्ली धमाके की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इसके तार और गहरे होते जा रहे हैं। अब जांच एजेंसियों की नज़र शाहीन और उसके उन दोस्तों पर है, जिन्होंने उसके साथ डॉक्टरी की पढ़ाई की थी। शाहीन ने साल 2002 में एमबीबीएस शुरू किया था और 2006 में एमडी पूरी की थी। बताया जा रहा है कि उसने प्रयागराज के मोतीलाल नेहरू सरकारी मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई की थी।
जांच में सामने आया है कि शाहीन और उसके कुछ पुराने मेडिकल साथी अब संदिग्ध निगरानी में हैं। एजेंसियों को शक है कि इन्हीं में से कुछ लोग आतंकी नेटवर्क से संपर्क में थे या फिर किसी तरह मदद कर रहे थे। शाहीन का नाम पहले डॉक्टर उमर के साथ जोड़ा जा चुका है, और अब यह पूरा मेडिकल सर्कल जांच के घेरे में आ गया है।
सूत्रों के मुताबिक, शाहीन के कई बैचमेट्स से पूछताछ की जा रही है। कुछ ने पिछले सालों में विदेश यात्राएं की थीं, जिनमें से कुछ यात्राएं संदिग्ध मानी जा रही हैं। एनआईए यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या मेडिकल शिक्षा के दौरान ही इन लोगों का संपर्क किसी आतंकी संगठन से हुआ था।
शाहीन की मेडिकल डिग्री और पेशेवर पहचान ने उसे समाज में एक मजबूत छवि दी थी, जिसका फायदा उसने नेटवर्क बनाने में उठाया। एजेंसियों के पास अब उसके पुराने कॉल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया कॉन्टैक्ट्स की लिस्ट है, जिससे यह समझने की कोशिश की जा रही है कि डॉक्टर उमर और शाहीन के बीच कितनी गहरी साझेदारी थी।
प्रयागराज के कॉलेज प्रशासन से भी पुराने रिकॉर्ड और छात्र डेटा मांगे गए हैं। जांच टीम का मानना है कि शाहीन का मेडिकल बैकग्राउंड इस पूरी साजिश में एक अहम भूमिका निभा रहा था , खासकर विस्फोटक तैयार करने और रासायनिक सामग्री की जानकारी के इस्तेमाल में।
फिलहाल एनआईए और दिल्ली पुलिस की टीमें इस पूरे मेडिकल नेटवर्क को खंगाल रही हैं। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, शाहीन और उसके साथ पढ़ने वाले कुछ डॉक्टरों के घरों पर छापे भी मारे गए हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि बहुत जल्द इस केस के कई और नाम सामने आने वाले हैं, जो दिल्ली धमाके की साजिश को पूरी तरह समझने में मदद करेंगे।