Last Updated Jan - 19 - 2026, 04:22 PM | Source : Fela News
नौवीं सदी में चीन में बारूद की खोज से जन्मी बंदूक तकनीक का पहला सैन्य उपयोग 1132 में जुरचेन हमलावरों के खिलाफ हुआ, जिसने युद्ध का स्वरूप बदला।
आज बंदूक आधुनिक युद्ध, सुरक्षा और शक्ति का प्रतीक मानी जाती है, लेकिन इसका इतिहास बेहद पुराना और रोचक है। आमतौर पर लोग बंदूक को यूरोप से जोड़ते हैं, जबकि असल में इसका जन्मस्थान चीन है। इतिहासकारों के अनुसार, बंदूक का आविष्कार चीन में नौवीं सदी के आसपास हुआ, जब ताओवादी रसायनविद अमरता का रहस्य खोजने में जुटे थे।
कहा जाता है कि इन रसायनविदों ने गलती से सल्फर, चारकोल और शोरा (पोटैशियम नाइट्रेट) को मिलाया, जिससे बारूद (Gunpowder) की खोज हुई। शुरुआत में यह खोज धार्मिक अनुष्ठानों और आतिशबाज़ी तक सीमित रही, लेकिन जल्द ही इसकी विस्फोटक शक्ति ने सैन्य रणनीतियों को नया मोड़ दे दिया। यही बारूद आगे चलकर बंदूक जैसी घातक तकनीक की नींव बना।
10वीं से 12वीं सदी के बीच चीन में एक नया हथियार विकसित हुआ जिसे "फायर लांस" कहा गया। यह दुनिया का पहला बंदूक जैसा हथियार माना जाता है। इसमें एक लंबी बांस या धातु की नली को भाले के सिरे पर लगाया जाता था। नली के अंदर बारूद भरा जाता और आग लगाने पर उससे लपटें, धुआं और छोटे धातु या मिट्टी के टुकड़े तेज़ी से बाहर निकलते थे। यह हथियार दुश्मनों में डर फैलाने और उन्हें घायल करने के लिए इस्तेमाल किया जाता था।
इतिहास में बंदूक का पहला स्पष्ट सैन्य उपयोग 1132 ईस्वी में दर्ज है। यह घटना डेआन (De'an) की घेराबंदी के दौरान हुई थी, जब सोंग राजवंश के सैनिकों ने उत्तर से आक्रमण करने वाले जुरचेन (Jurchen) योद्धाओं के खिलाफ फायर लांस का इस्तेमाल किया। पुराने चीनी दस्तावेजों के मुताबिक, इस युद्ध में लगभग 20 ऐसे हथियार तैनात किए गए थे। यह पहली बार था जब बारूद आधारित हथियारों का संगठित सैन्य उपयोग हुआ।
इसके बाद चीन में हथियार तकनीक तेजी से विकसित होने लगी। 13वीं सदी तक फायर लांस से विकसित होकर धातु की बैरल वाली असली हैंड कैनन बनने लगीं। हेलोंगजियांग हैंड कैनन (1288) को दुनिया की सबसे पुरानी बची हुई बंदूक माना जाता है। यह लोहे से बनी थी और इसमें ठोस प्रोजेक्टाइल दागे जाते थे।
बंदूक की तकनीक चीन से मंगोल साम्राज्य के ज़रिए एशिया, मध्य पूर्व और यूरोप तक पहुंची। व्यापार मार्गों और युद्धों के माध्यम से यह तकनीक फैलती गई और बाद में यूरोप में मस्केट, राइफल और आधुनिक गन सिस्टम विकसित हुए।
इस तरह, बंदूक का आविष्कार चीन की प्रयोगशालाओं में हुआ और इसका पहला इस्तेमाल जुरचेन हमलावरों के खिलाफ किया गया, जिसने विश्व युद्ध इतिहास को हमेशा के लिए बदल दिया ।
यह भी पढ़ें: