Last Updated Nov - 14 - 2025, 04:13 PM | Source : Fela News
बिहार 2025 में महिला वोटर्स के समर्थन ने नीतीश कुमार को फिर सत्ता की कुर्सी दिलाई।
बिहार चुनाव 2025 के नतीजों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि राज्य की राजनीति में महिला वोटर सबसे निर्णायक भूमिका निभाती हैं। और इसी ताकत ने नीतीश कुमार को 10वीं बार सत्ता के शिखर तक पहुंचा दिया। चुनावी नतीजों से साफ हुआ कि महिलाओं ने इस बार भी बड़े पैमाने पर एनडीए को समर्थन दिया, और इसका सीधा फायदा जेडीयू के कद्दावर नेता नीतीश कुमार को मिला।
पिछले कुछ वर्षों में राज्य सरकार की ओर से महिलाओं के लिए कई योजनाएं चलाई गईं,जिसमें सीधे खाते में पैसे भेजने का सिस्टम सबसे प्रभावी साबित हुआ। चुनाव से ठीक पहले महिलाओं के खातों में 10 हजार रुपये की राशि पहुंची, जिसने मतदाताओं में राज्य सरकार के प्रति भरोसा और मजबूत कर दिया। यह ट्रांसफर न केवल आर्थिक सहायता साबित हुआ, बल्कि सरकार के भरोसे और जवाबदेही का संदेश भी बनकर उभरा।
महिला वोटरों की लंबी कतारें अभियान के दौरान ही संकेत दे चुकी थीं कि उनकी प्राथमिकताएं साफ हैं—स्थिरता, सुरक्षा और आर्थिक सहयोग। नीतीश कुमार की छवि, जो वर्षों से ‘महिलाओं के हितैषी’ नेता की रही है, इस चुनाव में और मजबूत दिखाई दी। खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में महिलाओं ने बड़ी संख्या में एनडीए के पक्ष में मतदान किया, जिसने कई सीटों पर अंतर बढ़ाया।
विश्लेषकों का मानना है कि महिला मतदाताओं का यह रुझान सिर्फ आर्थिक सहायता की वजह से नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, शराबबंदी और स्वयं सहायता समूहों जैसी नीतियों के कारण भी मजबूत हुआ है। इन योजनाओं का सीधा प्रभाव परिवारों और गांवों में देखा गया है, जिससे महिलाओं में सुरक्षा और सम्मान का एहसास बढ़ा है।
महागठबंधन ने भी महिलाओं को लुभाने की कोशिश की, लेकिन उनके वादों में वह स्पष्ट भरोसा नहीं दिखा, जो नीतीश वर्षों से बनाते आ रहे थे। यही वजह है कि नतीजों ने एक बार फिर महिला शक्ति को बिहार की राजनीति का गेमचेंजर साबित कर दिया।
जैसे ही अंतिम परिणाम सामने आए, यह साफ हो गया कि नीतीश कुमार की कुर्सी पर पहुंचने का रास्ता महिलाओं ने ही सबसे सहज बनाया। यह चुनाव इस बात का प्रमाण बन गया कि बिहार में सत्ता की चाबी अब सीधे उस हाथ में है, जो अपनी जरूरतों और अपने परिवार के भविष्य को सबसे सटीक तरीके से समझता है, महिला मतदाता।