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Last Updated Nov - 18 - 2025, 03:50 PM | Source : Fela News
पटना की सियासत में हलचल बढ़ी है। लालू यादव के एक्टिव होते ही RJD में नई ऊर्जा और नई चुनौतियाँ नजर आ रही हैं। बदलते समीकरणों के बीच तेजस्वी की रणनीति पर सबकी नजर
पटना की सियासत में अचानक तेज हलचल शुरू हो गई है। लंबे समय से पीछे हटे दिख रहे लालू यादव फिर एक्टिव मोड में आए हैं, और इसी बदलाव ने तेजस्वी यादव के लिए नई उम्मीद भी जगा दी है और नई चुनौतियाँ भी खड़ी कर दी हैं। बिहार में बदलते समीकरणों के बीच RJD की बैठक और परिवार की अंदरूनी रणनीति पर सबकी नजर है।
पटना में हुई RJD की बैठकों ने साफ कर दिया कि पार्टी अब पूरी ताकत से फिर मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। लालू यादव की सक्रियता ने कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ाया है, लेकिन सवाल यही है कि क्या यह सक्रियता तेजस्वी यादव के लिए ढाल बन पाएगी। पिछले कुछ महीनों में पार्टी पर बढ़ते दबाव, बदलते राजनीतिक समीकरण और चुनावी तैयारियों की सुस्त रफ्तार को लेकर तेजस्वी लगातार आलोचनाओं में घिरे थे। ऐसे में लालू का सामने आना पार्टी को एकजुट करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
हालांकि, इस सक्रियता के पीछे पार्टी और परिवार दोनों की मजबूरियाँ भी छिपी हैं। RJD में अंदरूनी खींचतान, वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी और संगठन की कमजोरी को लेकर सवाल उठते रहे हैं। लालू यादव इन सबको संभालने में पारंपरिक तौर पर सक्षम माने जाते हैं। लेकिन अब उम्र और स्वास्थ्य की सीमाओं के बीच उनका फिर से पूरी जिम्मेदारी लेना आसान नहीं है। इसी वजह से तेजस्वी पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है कि वे नेतृत्व को मजबूत तरीके से संभालें और पार्टी में भरोसा कायम रखें।
दिलचस्प यह है कि लालू की सक्रियता को परिवार की एकजुटता दिखाने के संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है। विपक्ष में नीतीश कुमार और बीजेपी की ओर से लगातार हमले हो रहे हैं और RJD को यह दिखाना जरूरी था कि परिवार और पार्टी दोनों अभी भी मजबूत हैं। तेजस्वी यादव हाल के दिनों में कुछ हद तक अलग-थलग पड़े दिखाई दे रहे थे, लेकिन लालू की मौजूदगी ने एक तरह से उन्हें राजनीतिक ढाल प्रदान की है।
अब नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में RJD किस तरह अपनी राजनीतिक रणनीति को धार देती है। क्या लालू यादव की एंट्री पार्टी को नया जोश दे पाएगी, और क्या तेजस्वी अपनी स्थिति को मजबूत कर अपने खिलाफ उठ रही आवाजों को शांत कर पाएंगे—यही आने वाले राजनीतिक दौर की सबसे बड़ी कहानी बन सकती है।
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