Last Updated Apr - 09 - 2025, 01:29 PM | Source : Fela News
एक व्यक्ति की पत्नी को मृत मानकर उसे हत्या के आरोप में जेल भेजा गया, लेकिन दो साल बाद पत्नी के जीवित मिलने से पूरा मामला उलट गया।
कर्नाटक के कुशालनगर के निवासी 38 वर्षीय सुरेश ने दिसंबर 2020 में अपनी पत्नी मल्लिगे की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। कुछ समय बाद, बेट्टादपुरा क्षेत्र में एक महिला का कंकाल मिला, जिसे पुलिस ने मल्लिगे का मान लिया और सुरेश पर उसकी हत्या का आरोप लगाकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। सुरेश ने लगभग डेढ़ साल जेल में बिताए।
पत्नी का जीवित मिलना
1 अप्रैल 2025 को, सुरेश के एक मित्र ने मल्लिगे को मदिकेरी के एक होटल में एक अन्य व्यक्ति के साथ देखा। इस सूचना के आधार पर, मल्लिगे को अदालत में पेश किया गया, जहां उसने स्वीकार किया कि वह स्वेच्छा से घर छोड़कर दूसरे व्यक्ति के साथ रह रही थी।
पुलिस जांच पर सवाल
इस घटनाक्रम के बाद, मैसूरु की एक अदालत ने पुलिस की जांच में हुई खामियों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। अदालत ने पुलिस अधीक्षक को 17 अप्रैल तक पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि बिना डीएनए रिपोर्ट के पुलिस ने कैसे निष्कर्ष निकाला कि मिला कंकाल मल्लिगे का था और सुरेश को हत्या का दोषी ठहराया।
परिवार पर प्रभाव
सुरेश के जेल में रहने के दौरान, उनके बेटे कृष्णा ने पढ़ाई छोड़कर परिवार की जिम्मेदारियां संभालीं। अब, सुरेश की रिहाई के बाद, कृष्णा अपनी पढ़ाई फिर से शुरू करना चाहता है।
यह मामला पुलिस जांच की प्रक्रियाओं और साक्ष्यों के सत्यापन की आवश्यकता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अदालत के निर्देश के बाद, उम्मीद है कि इस मामले की गहन जांच होगी और भविष्य में ऐसी गलतियों से बचा जा सकेगा।