Last Updated Feb - 28 - 2026, 05:16 PM | Source : Fela news
इंदौर में 173 शराब दुकानों के ऑक्शन में MR-9 ग्रुप का रिजर्व प्राइस 49.94 करोड़ तय किया गया है। नई एक्साइज पॉलिसी के तहत कीमतों में करीब 20% बढ़ोतरी हुई है।
मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में शराब दुकानों की नीलामी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए एक्साइज विभाग ने 173 शराब दुकानों को ऑक्शन में शामिल किया है। इनमें MR-9 शराब दुकान ग्रुप सबसे ज्यादा चर्चा में है, क्योंकि इसका रिजर्व प्राइस 49.94 करोड़ रुपये तय किया गया है। यह शहर के इतिहास का अब तक का सबसे महंगा शराब ठेका माना जा रहा है।एक्साइज विभाग द्वारा तय किया गया यह रिजर्व प्राइस केवल शुरुआती बोली है। प्रतिस्पर्धा के आधार पर अंतिम नीलामी
राशि 50 करोड़ रुपये से भी अधिक पहुंच सकती है। MR-9 क्षेत्र को इंदौर का प्राइम और व्यस्त इलाका माना जाता है, जहां शराब की बिक्री का स्तर काफी ऊंचा रहता है। यही कारण है कि इस समूह की दुकानों को सबसे अधिक लाभकारी माना जा रहा है।
अगर पिछले वर्ष की तुलना करें तो यह बढ़ोतरी काफी महत्वपूर्ण है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इसी ठेके का रिजर्व प्राइस लगभग 38 से 45 करोड़ रुपये के बीच था। इस बार इसमें करीब 5 से 8 करोड़ रुपये की वृद्धि देखी गई है। यह बढ़ोतरी नई एक्साइज पॉलिसी 2026-27 के तहत की गई है, जिसमें रिजर्व प्राइस में लगभग 20 प्रतिशत इजाफा किया गया है।
राज्य सरकार का उद्देश्य शराब बिक्री से राजस्व बढ़ाना है। इंदौर जैसे बड़े और व्यावसायिक शहर में शराब की मांग लगातार बढ़ रही है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में जिले में शराब की कुल बिक्री 3,731 करोड़ रुपये से अधिक रही, जो पिछले साल की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाती है। बढ़ती मांग और बाजार क्षमता को देखते हुए विभाग ने कीमतों में संशोधन किया है।
नीलामी प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन ई-टेंडरिंग और ई-ऑक्शन सिस्टम के जरिए की जा रही है। इस डिजिटल प्रक्रिया का उद्देश्य पारदर्शिता बनाए रखना और प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना है। इच्छुक कॉन्ट्रैक्टर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अपनी बोली दर्ज करते हैं और सबसे अधिक बोली लगाने वाले को ठेका प्रदान किया जाता है। इससे मानव हस्तक्षेप कम होता है और प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि MR-9 जैसे प्राइम लोकेशन वाले ठेके लंबे समय में अच्छा मुनाफा दे सकते हैं। खर्च निकालने के बाद बड़े आउटलेट सालाना 75 लाख से 1 करोड़ रुपये तक का लाभ कमा सकते हैं। यही कारण है कि बड़े कारोबारी इन ठेकों में निवेश के लिए आगे आ रहे हैं।
कुल मिलाकर, इंदौर में शराब ठेकों की बढ़ती कीमतें शहर की आर्थिक गतिविधियों और उपभोग क्षमता को दर्शाती हैं। अब देखना यह होगा कि अंतिम नीलामी में बोली कितनी ऊंचाई तक पहुंचती है और क्या यह आंकड़ा 50 करोड़ से आगे निकल पाता है।
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