Last Updated Nov - 28 - 2025, 03:38 PM | Source : Fela News
समंदर में उठ रही दोहरी हलचल वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा रही है। दो सिस्टम एक साथ सक्रिय होने से मौसम में बड़ा बदलाव संभव है। तटीय क्षेत्रों में सतर्कता और निगरानी
भारत के समुद्री इलाके इन दिनों एक अनोखे दबाव में हैं। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी—दोनों जगह एक साथ दो साइक्लोनिक सिस्टम बन रहे हैं, जिनके नाम दित्वाह और सेन्यार दिए गए हैं। मौसम विभाग की नजर इन दोनों पर लगातार बनी हुई है क्योंकि इनकी दिशा और ताकत अगले कुछ दिनों में मौसम को काफी प्रभावित कर सकती है
मौसम विभाग के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, दित्वाह सिस्टम अरब सागर में सक्रिय है और धीरे-धीरे संगठित हो रहा है। वहीं, बंगाल की खाड़ी में बन रहा सेन्यार सिस्टम भी तेजी से ताकत जुटा रहा है। फिलहाल दोनों तूफान तटों से दूर हैं, लेकिन इनकी गति और दिशा बदलने पर पश्चिमी तट से लेकर पूर्वी राज्यों तक कई जगहों पर भारी बारिश, तेज हवाओं और समुद्र में ऊंची लहरों की संभावना बढ़ सकती है। मछुआरों के लिए चेतावनी जारी कर दी गई है और समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जब दो अलग-अलग समुद्री क्षेत्रों में एक साथ ऐसे सिस्टम बनते हैं, तो हवा का दबाव तेजी से बदलता है। इससे न सिर्फ तटीय इलाकों में लहरें ऊंची उठती हैं, बल्कि भीतर के राज्यों में भी अनियमित बारिश और आंधी जैसी स्थितियां बन सकती हैं। दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में आंशिक असर दिखने लगा है, जहां बादल ज्यादा घिर रहे हैं और हवाएं तेज हो रही हैं।
तटीय राज्यों की सरकारें भी सतर्क हैं। केरल, तमिलनाडु, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के प्रशासन ने समुद्र किनारे रहने वालों को सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं। कुछ इलाकों में स्थानीय स्तर पर राहत टीमें तैयार रखी गई हैं ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई हो सके। हालांकि मौसम विभाग ने साफ किया है कि अभी तक दोनों तूफानों के भारत के किसी तट से सीधे टकराने के संकेत नहीं हैं, लेकिन समुद्र की उथल-पुथल अगले कुछ दिन बनी रह सकती है।
दित्वाह और सेन्यार की यह दोहरी हलचल बताती है कि मौसम कितनी तेजी से बदल रहा है। आने वाले दिनों में इनकी गतिविधि पर हर अपडेट जरूरी होगा, क्योंकि भारतीय समुद्री क्षेत्र में ऐसे सिस्टम अक्सर अचानक ताकत पकड़कर बड़ा असर छोड़ते हैं। सतर्कता ही इस समय सबसे बड़ा बचाव है।