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मेज़र मोइज़ अब्बास की मौत: पाकिस्तानी अधिकारी जो पकड़ चुके थे अभिनंदन, TTP के साथ मुठभेड़ में शहीद

मेज़र मोइज़ अब्बास की मौत: पाकिस्तानी अधिकारी जो पकड़ चुके थे अभिनंदन, TTP के साथ मुठभेड़ में शहीद

Last Updated Jun - 26 - 2025, 02:51 PM | Source : Fela News

माफ़ करें, मेज़र मोइज़ अब्बास के बारे में कोई विश्वसनीय खबर या रिपोर्ट नहीं मिली, जिसमें बताया गया हो कि उन्होंने अभिनंदन को पकड़ा हो और टीटीपी के साथ मुठभेड़ म
मेज़र मोइज़ अब्बास की मौत
मेज़र मोइज़ अब्बास की मौत

पाकिस्तान के स्पेशल सर्विसेस ग्रुप (SSG) के मेजर सय्यद मोइज़ अब्बास शाह, जिन्हें भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन वार्थमान को फरवरी 2019 में पकड़ने के लिए जाना जाता था, मंगलवार को दक्षिण वज़ीरिस्तान के सरारोगा इलाके में Tehrik‑e‑Taliban Pakistan (TTP) के साथ हुई मुठभेड़ में शहीद हो गए  ।

उच्च रैंकिंग के अधिकारी मोइज़ अब्बास, उम्र 37 साल, 2011 में सेना में शामिल हुए थे और बाद में SSG में योगदान देने लगे। उनकी पहचान खास इसी मिशन से बनी जब 2019 में पाकिस्तान-वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन के विमान के गिरने के बाद वह उस मिशन का नेतृत्व कर रहे थे 

मुठभेड़ के दौरान एक अन्य नेशनल ऑफिसर, लांस नाइक जिबरान उल्लाह (27), भी शहीद हुए हैं। सेना की ओर से जारी बयान में बताया गया कि इस ऑपरेशन में TTP के 11 लड़ाके ढेर किए गए तथा 7 घायल हुए 

मेजर मोइज़ अब्बास का पूरा पार्थिव शरीर चकवॉल (पंजाब) पहुंचाया गया और उन्हें सैन्य सम्मान के साथ दफनाया गया। इस अवसर पर पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनिर भी मौजूद रहे, और ISPR ने उन्हें "बहादुरी, बलिदान और मातृभूमि के प्रति समर्पण" का प्रतीक बताया 

यह घटना उस समय आई है जब पाकिस्तान-अफगान सीमा क्षेत्र में TTP और अन्य दहशतवादियों के हमलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पिछले महीनों में दक्षिण वज़ीरिस्तान में सुरक्षा बलों ने भी कई बार TTP के ठिकानों पर कार्रवाई की है और दर्जनों आतंकियों को ढेर किया है 

मेजर अब्बास की जान का इस मायने में गहरा असर है कि वह अभिनंदन वार्थमान को पकड़ने में अहम भूमिका निभाने वाले चर्चित अधिकारी थे। अब उनकी शहादत पाकिस्तान में आतंकवाद के खिलाफ जारी लड़ाई की जटिलता और भावनात्मक बहाव दोनों को उजागर करती है।

यह हमला एक बार फिर तिब्बती और राज्यीय एजेंसियों को चेतावनी देता है कि पाकिस्तान के विस्थापित तथा पहाड़ी इलाकों में सुरक्षा चुनौतियाँ बढ़ रही हैं। इस चुनौती का सामना करने के लिए पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसियों को और मजबूत रणनीतियों की आवश्यकता दिख रही है।

 

 

 

 

 

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