Last Updated Mar - 31 - 2025, 01:26 PM | Source : Fela News
वक्फ संशोधन विधेयक पर मौलाना खालिद सैफउल्लाह रहमानी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे मुस्लिम समुदाय के धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन बताया और विधेयक के खिलाफ
केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर देशभर में बहस तेज़ हो गई है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष, मौलाना खालिद सैफउल्लाह रहमानी, ने इस विधेयक पर अपनी गहरी चिंता और विरोध प्रकट किया है।
विधेयक के प्रति मौलाना की आपत्ति
मौलाना रहमानी का मानना है कि यह विधेयक वक्फ संपत्तियों को नुकसान पहुंचा सकता है, जो मुस्लिम समुदाय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा, "वक्फ हमारे लिए सब कुछ है—हमारी मस्जिदें, मदरसे, कब्रिस्तान। वक्फ को नुकसान पहुंचाने का मतलब हमारी पूरी विरासत को नुकसान पहुंचाना है।"
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना
मौलाना रहमानी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 'बुलडोजर नीति' की आलोचना करते हुए कहा कि अपराधियों की संपत्तियों पर बुलडोजर चलाने के बजाय, उन संपत्तियों को वक्फ को सौंप देना चाहिए। उन्होंने योगी आदित्यनाथ के उस बयान को भी खारिज किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि पहले वक्फ जिस जमीन को अपना कह देता था, वह उसकी हो जाती थी। मौलाना ने इसे झूठा बताते हुए कहा, "1200 सालों तक मुसलमानों ने शासन किया, लेकिन किसी को कोई दिक्कत नहीं हुई।"
तेलंगाना के मुख्यमंत्री से अपील
मौलाना रहमानी ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री से अपील की कि वे इस विधेयक का समर्थन न करें। उन्होंने खुशी जताई कि कई विपक्षी पार्टियां इस विधेयक के खिलाफ हैं और उम्मीद जताई कि सामूहिक विरोध से सरकार इस पर पुनर्विचार करेगी।
समुदाय से आंदोलन की तैयारी का आह्वान
मौलाना रहमानी ने मुस्लिम समुदाय से आह्वान किया कि वे इस विधेयक के खिलाफ आवाज़ उठाएं। उन्होंने कहा, "यह हमारे लिए जीवन और मृत्यु का प्रश्न है। हमें हर कीमत पर इसे रोकना चाहिए। यदि आवश्यक हुआ, तो देश के मुसलमान जेल भर देंगे, लेकिन इस अन्याय को स्वीकार नहीं करेंगे।"
विधेयक का समर्थन करने वाले मुस्लिम नेता
इसके विपरीत, ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी ने वक्फ संशोधन विधेयक का समर्थन किया है। उनका मानना है कि यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के सही प्रबंधन और भ्रष्टाचार को रोकने में मदद करेगा। उन्होंने कहा, "हमारे बुजुर्गों ने अपनी जमीन-जायदाद इसलिए वक्फ की थी कि उससे होने वाली आमदनी गरीब और कमजोर वर्ग के मुसलमानों की मदद के लिए खर्च की जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।"
वक्फ संशोधन विधेयक पर मुस्लिम समुदाय में मतभेद स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आए हैं। जहां एक ओर मौलाना खालिद सैफउल्लाह रहमानी जैसे नेता इसे समुदाय के लिए हानिकारक मानते हैं, वहीं मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी जैसे अन्य नेता इसका समर्थन करते हैं। आने वाले दिनों में इस विषय पर और भी चर्चाएं और विरोध प्रदर्शन होने की संभावना है, जो देश की राजनीति और समाज पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकते हैं।