Last Updated Feb - 19 - 2026, 12:39 PM | Source : Fela News
यूपी चुनाव 2027 से पहले AIMIM -बसपा गठबंधन की चर्चाओं पर मायावती ने बड़ा बयान दिया. उन्होंने साफ किया कि बसपा किसी भी दल से गठबंधन नहीं करेगी.
उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज होती जा रही है. इसी बीच बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के संभावित गठबंधन की चर्चाओं ने राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर शुरू कर दिया था. अब बसपा सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने इन सभी अटकलों पर स्पष्ट और निर्णायक बयान देकर तस्वीर साफ कर दी है.
मायावती ने साफ शब्दों में कहा कि बसपा आगामी विधानसभा चुनाव किसी भी राजनीतिक दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी और पार्टी अकेले चुनाव मैदान में उतरेगी. उन्होंने AIMIM के साथ संभावित गठबंधन की खबरों को पूरी तरह से झूठ और भ्रामक बताया.
मायावती ने मीडिया पर भी निशाना साधते हुए कहा कि कुछ मीडिया संस्थान जानबूझकर इस तरह की खबरें फैलाकर बसपा की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं.
प्रेस वार्ता के दौरान मायावती ने कहा कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, बसपा के विरोधी और भी ज्यादा सक्रिय हो जाएंगे और पार्टी को कमजोर करने के लिए तरह-तरह की साजिशें रची जाएंगी. उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे ऐसी अफवाहों पर ध्यान न दें और पार्टी को मजबूत करने के लिए पूरी ताकत से काम करें.
मायावती ने यह भी कहा कि बसपा का इतिहास गवाह है कि पार्टी ने 2007 में बिना किसी गठबंधन के पूर्ण बहुमत हासिल किया था और इस बार भी पार्टी उसी आत्मविश्वास के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी. उन्होंने दावा किया कि बसपा के कार्यकर्ता पूरी मजबूती से जमीनी स्तर पर काम कर रहे हैं और जनता का समर्थन पार्टी के साथ है.
बसपा सुप्रीमो ने अन्य राजनीतिक दलों पर भी हमला करते हुए कहा कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बीजेपी की नीतियां बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के सिद्धांतों के खिलाफ रही हैं. उन्होंने कहा कि बसपा का उद्देश्य केवल सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और सम्मान की लड़ाई को आगे बढ़ाना है.
AIMIM के साथ गठबंधन की चर्चाओं के पीछे की वजह यह मानी जा रही थी कि उत्तर प्रदेश में मुस्लिम और दलित वोट बैंक को एकजुट करने की रणनीति अपनाई जा सकती है.
हालांकि मायावती के इस बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि बसपा फिलहाल किसी भी गठबंधन के मूड में नहीं है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मायावती का यह फैसला पार्टी की स्वतंत्र पहचान और मजबूत राजनीतिक स्थिति बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा है.
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में बसपा किस तरह अपनी चुनावी रणनीति को आगे बढ़ाती है और क्या वह एक बार फिर यूपी की राजनीति में मजबूत वापसी कर पाती है.
मायावती के इस ऐलान के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में एक नई बहस शुरू हो गई है और आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं.
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