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ज़हर बनती दवा या सिस्टम की नाकामी

ज़हर बनती दवा या सिस्टम की नाकामी

Last Updated Oct - 10 - 2025, 05:46 PM | Source : Fela News

भारत में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक हर तीन घंटे में एक दवा फेल हो रही है — चाहे वो कफ सिरप हो या कैप्सूल। सवाल य
ज़हर बनती दवा या सिस्टम की नाकामी
ज़हर बनती दवा या सिस्टम की नाकामी

भारत, जिसे कभी “फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड” कहा जाता था, आज अपनी दवा क्वालिटी को लेकर सवालों के घेरे में है। हालिया सरकारी रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि देश में हर तीन घंटे में एक दवा क्वालिटी टेस्ट में फेल हो रही है। यह नतीजा न सिर्फ हैरान करने वाला है बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था पर गहरी चोट करने वाला भी है।

फेल होने वाली दवाओं की सूची में कफ सिरप से लेकर एंटीबायोटिक और विटामिन कैप्सूल तक शामिल हैं। खास बात यह है कि ये दवाएं सिर्फ छोटे स्थानीय ब्रांड नहीं, बल्कि कुछ नामी कंपनियों की भी पाई गई हैं। जांच में सामने आया है कि कई नमूनों में ज़रूरी रासायनिक तत्वों की मात्रा तय मानक से कम थी, जबकि कुछ मामलों में हानिकारक तत्वों का असर ज़्यादा पाया गया।

विशेषज्ञों का कहना है कि दवाओं की खराब क्वालिटी का सीधा असर मरीजों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। कई बार इलाज बेअसर हो जाता है, और कभी-कभी यह जानलेवा भी साबित होता है। पिछले साल कई देशों में भारतीय कफ सिरप को लेकर विवाद खड़ा हुआ था, जिसके बाद सरकार ने सख्त जांच के आदेश दिए थे।

फिर भी सवाल वहीं का वहीं है — अगर हर तीन घंटे में एक दवा फेल हो रही है, तो नियामक संस्थाएं क्या कर रही हैं? दवा निर्माण, लाइसेंसिंग और टेस्टिंग की प्रक्रिया में खामियां लगातार सामने आ रही हैं।

अब ज़रूरत है कि दवा उद्योग में पारदर्शिता बढ़ाई जाए, टेस्टिंग लैब्स को मज़बूत किया जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। क्योंकि अगर इलाज पर ही भरोसा उठ जाए, तो फिर बीमारी से लड़ने की ताकत भी कमजोर पड़ जाती है , और यही भारत की दवा व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा बनता जा रहा है।

 

 

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