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नागपुर में पीएम मोदी की आरएसएस मुख्यालय यात्रा पर सियासी घमासान, संजय राउत ने दिया बड़ा बयान

नागपुर में पीएम मोदी की आरएसएस मुख्यालय यात्रा पर सियासी घमासान, संजय राउत ने दिया बड़ा बयान

Last Updated Apr - 02 - 2025, 01:41 PM | Source : Fela News

नागपुर में पीएम मोदी की RSS मुख्यालय यात्रा पर राजनीतिक विवाद छिड़ गया। शिवसेना नेता संजय राउत ने इस पर बड़ा बयान दिया, जिससे सियासी हलचल तेज हो गई।
नागपुर में पीएम मोदी की आरएसएस मुख्यालय यात्रा पर सियासी घमासान
नागपुर में पीएम मोदी की आरएसएस मुख्यालय यात्रा पर सियासी घमासान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को नागपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) मुख्यालय का दौरा किया, जिससे सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। पीएम मोदी 24 वर्षों में केवल दूसरे ऐसे प्रधानमंत्री बने जिन्होंने आरएसएस मुख्यालय का दौरा किया। इससे पहले, साल 2000 में अटल बिहारी वाजपेयी ने यहां यात्रा की थी। इस दौरे के दौरान पीएम मोदी ने माधव नेत्रालय प्रीमियम सेंटर की आधारशिला भी रखी, जो दिवंगत आरएसएस प्रमुख माधवराव गोलवलकर के नाम पर स्थापित किया जा रहा है।

नागपुर दौरे के सियासी मायने

पीएम मोदी के इस दौरे को लेकर राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने इस यात्रा को लेकर बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि पीएम मोदी आरएसएस मुख्यालय इसलिए गए थे ताकि वे अपनी 'राजनीतिक संन्यास' की घोषणा कर सकें।

संजय राउत का बड़ा दावा

मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संजय राउत ने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी आरएसएस कार्यालय में अपनी सेवानिवृत्ति की घोषणा करने गए थे। उन्होंने लगभग एक दशक से नागपुर में आरएसएस मुख्यालय का दौरा नहीं किया था। मेरी जानकारी के अनुसार, आरएसएस अब नेतृत्व में बदलाव चाहता है।"

क्या महाराष्ट्र से होगा मोदी का उत्तराधिकारी?

संजय राउत ने आगे दावा किया कि आरएसएस मोदी के उत्तराधिकारी को चुनने की तैयारी कर रहा है और यह उत्तराधिकारी महाराष्ट्र से होगा। उन्होंने कहा, "यही कारण है कि मोदी को नागपुर बुलाया गया था, जहां इस मुद्दे पर बंद कमरे में बैठक हुई।" हालांकि, इस बयान पर आरएसएस या बीजेपी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

आरएसएस की भूमिका पर बढ़ी चर्चा

आरएसएस हमेशा से भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण संगठन रहा है, लेकिन सीधे तौर पर राजनीति में दखल देने से इनकार करता रहा है। ऐसे में संजय राउत का दावा राजनीतिक रूप से बेहद बड़ा माना जा रहा है। हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी और आरएसएस इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या वास्तव में कोई नेतृत्व परिवर्तन की योजना बनाई जा रही है।

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