Last Updated Jan - 06 - 2026, 05:37 PM | Source : Fela News
महाराष्ट्र BJP अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण के विलासराव देशमुख पर बयान से विवाद बढ़ा। रितेश देशमुख ने भावुक प्रतिक्रिया देते हुए पिता की विरासत को अटूट बताया।
महाराष्ट्र की राजनीति में उस वक्त नया विवाद खड़ा हो गया, जब भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष Ravindra Chavan ने दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री Vilasrao Deshmukh को लेकर एक टिप्पणी की। उनके इस बयान ने न सिर्फ राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी, बल्कि आम लोगों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।
रवींद्र चव्हाण ने एक सार्वजनिक बयान में कहा कि विलासराव देशमुख की यादों और नाम को उनके गृह जिले Latur से "मिटा दिया जाएगा।" इस टिप्पणी के सामने आते ही कांग्रेस पार्टी ने इसे दिवंगत नेता का अपमान बताते हुए कड़ी निंदा की। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि विलासराव देशमुख सिर्फ एक राजनेता नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में एक युग का नाम थे।
इस बयान पर विलासराव देशमुख के दोनों बेटों-अमित देशमुख और बॉलीवुड अभिनेता Riteish Deshmukh — ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। खासकर रितेश देशमुख का जवाब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। रितेश ने भावुक अंदाज में लिखा कि कुछ नाम पत्थरों पर नहीं, बल्कि लोगों के दिलों में अंकित होते हैं और उन्हें मिटाया नहीं जा सकता।
रितेश देशमुख ने कहा कि उनके पिता ने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में महाराष्ट्र और खासकर मराठवाड़ा के विकास के लिए काम किया। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जनता का प्यार और सम्मान किसी बयान से खत्म नहीं किया जा सकता। रितेश की इस प्रतिक्रिया को उनके प्रशंसकों और कई राजनीतिक नेताओं ने समर्थन दिया।
वहीं, कांग्रेस नेताओं ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह राजनीतिक लाभ के लिए दिवंगत नेताओं की विरासत को निशाना बना रही है। कांग्रेस का कहना है कि विलासराव देशमुख ने दो बार मुख्यमंत्री रहते हुए राज्य को स्थिरता और विकास की दिशा दी, जिसे भुलाया नहीं जा सकता।
इस पूरे मामले पर भाजपा की ओर से सफाई देते हुए कुछ नेताओं ने कहा कि बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। हालांकि, रवींद्र चव्हाण के शब्दों को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आगामी राजनीतिक समीकरणों और क्षेत्रीय भावनाओं से भी खासकर मराठवाड़ा क्षेत्र में, जहां विलासराव देशमुख का गहरा प्रभाव रहा है। जुड़ा है,कुल मिलाकर, इस बयान ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि दिवंगत नेताओं की विरासत और स्मृतियां आज भी राजनीति में कितनी संवेदनशील और प्रभावशाली भूमिका निभाती हैं। रितेश देशमुख का जवाब इस पूरे विवाद का भावनात्मक केंद्र बन गया है, जिसे लोग "बेटे की ओर से पिता को सच्ची श्रद्धांजलि" के रूप में देख रहे हैं।