Last Updated Feb - 27 - 2025, 05:18 PM | Source : Fela News
दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से उपस्थित सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सीआईसी का आदेश रद्द किया जाना चाहिए
दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार (27 फरवरी, 2025) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्नातक डिग्री के बारे में जानकारी देने के सीआईसी के आदेश को चुनौती देने वाली दिल्ली विश्वविद्यालय की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखा। न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने कहा,तर्क सुने गए। फैसला सुरक्षित रखा गया है।दिल्ली विश्वविद्यालय के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सीआईसी का आदेश रद्द होना चाहिए, लेकिन दिल्ली विश्वविद्यालय ने अदालत को रिकॉर्ड दिखाने में कोई आपत्ति नहीं जताई।
मेहता ने कहा, विश्वविद्यालय को अदालत को रिकॉर्ड दिखाने में कोई आपत्ति नहीं है। इसमें 1978 की कला स्नातक की डिग्री है।नीरज नामक व्यक्ति द्वारा आरटीआई आवेदन के बाद, केन्द्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने 21 दिसंबर, 2016 को 1978 में बीए की परीक्षा पास करने वाले सभी छात्रों के रिकॉर्ड की जांच की अनुमति दी, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी भी शामिल थे। उच्च न्यायालय ने 23 जनवरी, 2017 को सीआईसी के आदेश पर रोक लगा दी थी।
डीयू ने 11 फरवरी को तर्क दिया कि उसके पास यह सूचना प्रत्ययी हैसियत में है और जनहित के अभाव में केवल जिज्ञासा के आधार पर किसी को आरटीआई कानून के तहत निजी सूचना मांगने का अधिकार नहीं है। इसमें कहा गया है कि आरटीआई अधिनियम को मजाक बना दिया गया है, जिसमें प्रधानमंत्री सहित 1978 में बीए परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले सभी छात्रों के रिकॉर्ड मांगे गए हैं