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राहुल गांधी का Modi सरकार पर कड़ावार: US डील से 'बेच देश' आरोप

राहुल गांधी का Modi सरकार पर कड़ावार: US डील से 'बेच देश' आरोप

Last Updated Feb - 24 - 2026, 06:18 PM | Source : Fela News

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील, एपस्टीन फाइल्स और बड़े उद्योगपतियों के कथित रिश्तों को लेकर प्रधानमंत्री मोदी पर तीखे आरोप लगाए हैं, जिससे राजनीतिक उठापटक तेज हुई है।
राहुल गांधी का Modi सरकार पर कड़ावार
राहुल गांधी का Modi सरकार पर कड़ावार

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर शनिवार-रविवार को कड़े राजनीतिक आरोप लगाए, जिनमें खास तौर पर भारत-अमेरिका ट्रेड डील (India US trade deal), एपस्टीन फाइल्स और बड़े उद्योगपतियों के कथित प्रभाव को शामिल किया गया है। 

अपने ट्वीट और बयान में राहुल गांधी ने कहा कि अगर मोदी सरकार देश की असल हितों और नागरिकों की सुरक्षा पर ध्यान नहीं देगी तो यह राष्ट्र के लिए शर्म की बात बन जाएगा। उन्होंने कहा, “आप 'शर्म' की बात करते हो? मैं आपको असली शर्म की बात बता दूँ ।" इस बयान में उन्होंने एपस्टीन फाइल्स का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री और उनके एक सहयोगी का नाम आपत्तिजनक संबंध में जोड़ने का आरोप लगाया। 

राहुल गांधी ने कहा कि भारत-अमेरिका के बीच जो व्यापार समझौता किया गया है, वह भारत के हितों के विपरीत है। उनका आरोप है कि यह डील देश के किसानों, छोटे उद्योगों और स्थानीय उत्पादन को नुकसान पहुँचा सकती है। विश्लेषकों के अनुसार कांग्रेस का यह रुख इस बात को दर्शाता है कि पार्टी इस डील को राष्ट्रीय हितों के विपरीत और विदेशी दबाव का परिणाम बता रही है। 

उन्होंने विशेष रूप से कहा कि इस ट्रेड डील की वजह से भारत अपने कृषि और डेयरी सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सामना करेगा, जो भारतीय किसानों के लिए गंभीर खतरा है। राहुल गांधी की यह टिप्पणी उस समय आई है जब सरकार इस डील को देश की आर्थिक प्रगति और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने वाला बता रही है। 

इसके अलावा राहुल गांधी ने एपस्टीन फाइल्स का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री, उनके मंत्री और कुछ अन्य लोगों के नाम ऐसे दस्तावेजों में दिखाई दिए हैं, जिनका संबंध अमेरिकी वित्तीय विवादों से रहा है। उन्होंने इसे “" घिनौना और शर्मनाक” बताया और कहा कि ऐसा देश के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति के लिए स्वीकार्य नहीं है। 

राजनीतिक आलोचना का एक हिस्सा उद्योगपतियों के साथ कथित नज़दीकियों से जुड़ा रहा है। राहुल गांधी ने अप्रत्यक्ष रूप से यह संकेत दिया कि बड़े उद्योगपति - विशेषकर अडानी समूह — और सत्ता के बीच के रिश्ते से भी यह समझौता प्रभावित हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को स्पष्ट करना जरूरी है कि क्या निर्णय सार्वजनिक हित के लिए हुआ है या निजी हितों के प्रभाव में। 

सरकार की ओर से इस आलोचना का जवाब दिया गया है कि यह डील भारत की आर्थिक और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को करने के उद्देश्य से किया गया है और इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री ने कहा है कि किसानों के हितों की रक्षा और घरेलू उत्पादन को सुरक्षित रखना डील की पहली प्राथमिकता है। 

राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार राहुल गांधी की ये टिप्पणियाँ आगामी चुनावों और संसदीय सत्रों के बीच पार्टी को रणनीतिक रूप से मजबूती देने की कोशिश हैं, जिसमें कांग्रेस सरकार की नीतियों को राष्ट्रीय हितों के खिलाफ दिखाने की कोशिश कर रही है। 

राजनीतिक माहौल में यह बयानबाज़ी नई सियासी बहस और मीडिया चर्चा का विषय बनी हुई है, क्योंकि विपक्ष और सरकार के बीच ट्रेड डील, राष्ट्रीय सुरक्षा, और पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर बहस तेज हो गई है। 

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