Last Updated Aug - 06 - 2025, 02:48 PM | Source : Fela News
डाक विभाग ने घोषणा की है कि 50 साल पुरानी रजिस्टर्ड पोस्ट सेवा 1 सितंबर 2025 से बंद हो जाएगी और इसे स्पीड पोस्ट सेवा में मिला दिया जाएगा, जिससे डिलीवरी तेज होगी
देशभर में भरोसे का प्रतीक मानी जाने वाली रजिस्टर्ड पोस्ट सेवा अब इतिहास बनने जा रही है। डाक विभाग ने घोषणा की है कि 1 सितंबर 2025 से यह सेवा बंद कर दी जाएगी और इसका स्पीड पोस्ट में विलय किया जाएगा। इससे ग्रामीण इलाकों, छोटे कारोबारियों और किसानों पर असर पड़ सकता है, जो अब भी सस्ते डाक विकल्पों पर निर्भर हैं।
भारत की 50 साल पुरानी रजिस्टर्ड पोस्ट सेवा अब धीरे-धीरे समाप्त की जा रही है। डाक विभाग (India Post) ने फैसला किया है कि 1 सितंबर 2025 से यह सेवा बंद कर दी जाएगी और इसे स्पीड पोस्ट सेवा में मिला दिया जाएगा। यह कदम डाक सेवाओं को आधुनिक और तेज़ बनाने की दिशा में उठाया गया है, लेकिन इससे जुड़ी भावनात्मक और सामाजिक विरासत को लेकर लोगों में गहरी उदासी भी है।
रजिस्टर्ड पोस्ट, जो लंबे समय से अपनी कानूनी वैधता, भरोसेमंद डिलीवरी और किफायती दरों के लिए पहचानी जाती थी, अब डिजिटल युग और निजी कूरियर सेवाओं की प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रही थी। 2011-12 में जहां 244.4 मिलियन रजिस्टर्ड आइटम भेजे गए थे, वहीं 2019-20 में यह घटकर 184.6 मिलियन रह गए, यानी 25% की गिरावट दर्ज हुई।
डाक विभाग का कहना है कि स्पीड पोस्ट में विलय से बेहतर ट्रैकिंग, तेज़ डिलीवरी और परिचालन दक्षता मिलेगी। स्पीड पोस्ट सेवा 1986 से सक्रिय है और इसे पहले से ही डिजिटल ट्रैकिंग और डिलीवरी प्रमाणन जैसी सुविधाओं से लैस किया गया है।
वर्तमान में रजिस्टर्ड पोस्ट की कीमत ₹25.96 + ₹5 प्रति अतिरिक्त 20 ग्राम है, जबकि स्पीड पोस्ट ₹41 प्रति 50 ग्राम से शुरू होती है। ऐसे में यह 20–25% महंगी साबित हो सकती है, जिससे ग्रामीण नागरिकों, छोटे व्यापारियों और किसानों पर आर्थिक असर पड़ सकता है।
सचिव और डाक महानिदेशक ने सभी सरकारी विभागों, अदालतों, शैक्षणिक संस्थानों और रजिस्टर्ड पोस्ट उपयोगकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वे 1 सितंबर 2025 तक पूरी तरह स्पीड पोस्ट पर शिफ्ट हो जाएं।
रजिस्टर्ड पोस्ट की शुरुआत ब्रिटिश शासन के दौर में हुई थी और यह सेवा वर्षों तक बैंक, कोर्ट, विश्वविद्यालयों और सरकारी कार्यालयों में दस्तावेजों के कानूनी और सुरक्षित आदान-प्रदान के लिए इस्तेमाल होती रही। यह केवल एक सेवा नहीं, बल्कि लोगों के विश्वास और विधिक सबूत का आधार थी।
इस सेवा का बंद होना जहां तकनीकी विकास और तेज़ डिलीवरी की दिशा में कदम है, वहीं यह लाखों लोगों के लिए एक भावनात्मक और ऐतिहासिक क्षति भी है। खासकर ग्रामीण भारत और बुजुर्ग पीढ़ी के लिए, जो आज भी इस सेवा को सबसे भरोसेमंद मानते हैं।