Last Updated Dec - 04 - 2025, 03:29 PM | Source : Fela News
सात साल बाद ब्रह्मोस वैज्ञानिक निशांत अग्रवाल बरी, कमजोर सबूतों के आधार पर रिहाई।
ब्रह्मोस मिसाइल यूनिट के पूर्व वैज्ञानिक निशांत अग्रवाल को आखिरकार बड़ी राहत मिली है। पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार हुए निशांत को अदालत ने बरी कर दिया और सात साल बाद वह जेल से बाहर आ गए। यह वही मामला है जिसमें उन पर ‘सेजल’ नाम की एक फर्जी आईडी के जरिए फंसाए जाने का आरोप सामने आया था।
निशांत को 2018 में गिरफ्तार किया गया था। आरोप थे कि उन्होंने ब्रह्मोस से जुड़ी संवेदनशील जानकारी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी तक पहुंचाई। जांच के दौरान दावा किया गया कि उन्हें सोशल मीडिया पर एक महिला के नाम से बने फर्जी अकाउंट के जरिए ट्रैप किया गया था। यह भी कहा गया था कि बातचीत के दौरान उनसे कई अहम जानकारियां निकलवाई गईं।
लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अदालत ने माना कि जांच में कई कमजोरियां थीं और पुख्ता सबूत नहीं मिले। इसी आधार पर निशांत अग्रवाल को रिहा कर दिया गया। सात साल की जेल के बाद उनके परिवार ने इसे न्याय की जीत बताया।
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर फर्जी पहचान बनाकर किस तरह संवेदनशील क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को निशाना बनाया जाता है। निशांत की रिहाई के साथ यह विवाद भी नए सवाल छोड़ गया है कि साइबर जाल में फंसकर कितनी जानकारियां गलत हाथों में जा सकती थीं और सुरक्षा एजेंसियों को ऐसे मामलों में और सतर्क रहने की जरूरत है।
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