Last Updated Jul - 17 - 2025, 12:46 PM | Source : Fela News
ख़ास सूचना से लैस SIT पर सुप्रीम कोर्ट ने संदेह जताया और आदेश दिया कि उनकी जांच केवल फेसबुक पोस्ट तक सीमित रहे।
नयी दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने अलीगढ़ SIT की भूमिका पर सवाल उठाया, जो अशोका विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अली ख़ान महमूदाबाद के “ऑपरेशन सिंदूर” फेसबुक पोस्ट से जुड़ी जांच को लेकर बनी थी। बुधवार को कोर्ट ने चेतावनी दी कि SIT जांच के दायरे से भटक कर "अनुचित विस्तार" कर रही है ।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह जांच केवल उनके सोशल मीडिया पोस्ट की सीमाएँ जांचे, न कि विश्वविद्यालय की स्वतंत्रता या शिक्षा क्षेत्र के मुद्दों में दखल दे। कोर्ट शाम को दोबारा सुनवाई में कहा कि गवाहों और जांच के विस्तार में सतर्क रहना चाहिए। यह निर्णय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अकादमिक क्षेत्र की छूट की रक्षा का एक अहम मोर्चा साबित होगा।
विशेष रूप से अदालती टिप्पणी रही: “You don’t need dictionary…” जब कोर्ट ने SIT द्वारा पोस्ट व्याख्या में भाषा संबंधी उलझनों की आलोचना की । इससे स्पष्ट हुआ कि सुप्रीम कोर्ट जांच एजेंसियों को निष्पक्ष और संयमी तरीके से कार्य करने की सीख दे रही है।
अभिव्यक्ति और शिक्षा पर सेंसरशिप की आशंका समय-समय पर उठती रही है, लेकिन इस फैसले से यह संदेश गया कि सोशल मीडिया पर अकादमिक अभिव्यक्ति को बिना उचित प्रक्रिया के आपत्तिस्पद नहीं समझा जाएगा।
इस मामले की अगली सुनवाई जल्द निर्धारित की जाएगी और उम्मीद की जा रही है कि कोर्ट आगे की जांच की दिशा तय करेगा, जिससे जांच एजेंसियों के अधिकार सीमित रह सकें।