Last Updated Mar - 01 - 2025, 01:15 PM | Source : Fela News
प्रदूषण नियंत्रण उपायों और रणनीतियों पर रिपोर्ट तैयार करने की मांग।
उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को राजस्थान की जल महल झील के संरक्षण में नगर निगम जयपुर हेरिटेज की लापरवाही पर कड़ी टिप्पणी की है। न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि नगर निगम की निष्क्रियता के कारण यह ऐतिहासिक झील गंभीर रूप से प्रदूषित हो गई है।
पीठ ने नगर निकाय को निर्देश दिया कि वह राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (नीरी) की सहायता से झील के जीर्णोद्धार और संरक्षण के लिए त्वरित प्रदूषण नियंत्रण उपायों और दीर्घकालिक रणनीतियों पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करे।
पीठ ने सवाल उठाया कि जल महल झील को नुकसान पहुंचाकर जयपुर शहर कैसे 'स्मार्ट' बन सकता है। साथ ही, नगर निगम आयुक्त की स्मार्ट सिटी की पृष्ठभूमि में आभासी सुनवाई में उपस्थिति पर विडंबना जताई।
अदालत जयपुर नगर निकाय द्वारा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के 2023 के आदेश के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई कर रही थी। एनजीटी ने निर्देश दिया था कि झील के पास रात्रि बाजार जैसी गतिविधियों के लिए पर्यावरण संबंधी मंजूरी आवश्यक है।
जल महल झील के गंभीर क्षरण के लिए अदालत ने नगर निगम की उपेक्षा को जिम्मेदार ठहराया। कोर्ट ने नगर निगम अधिकारियों की निंदा करते हुए कहा कि आस-पास के क्षेत्र में रात्रि बाजार लगाने की अनुमति दी गई और गंदा सीवेज तथा निगम का अपशिष्ट झील में छोड़ा गया, जिससे पानी पूरी तरह से दूषित हो गया।
पीठ ने नगर निगम के उस दावे को भी खारिज कर दिया कि तथाकथित विकास परियोजना का उद्देश्य झील को लाभ पहुंचाना था, और कहा कि इसका पुनर्स्थापना और संरक्षण से कोई संबंध नहीं है ।
पीठ ने जल महल झील के पास किसी भी विकास परियोजना पर रोक लगा दी, जब तक कि NEERI अपनी सिफारिशें प्रस्तुत नहीं कर देता। इसके अलावा, न्यायालय ने नगर निगम जयपुर हेरिटेज को निर्देश दिया कि झील के आस-पास कोई वेंडिंग या बाजार गतिविधियां न होने दें