Last Updated Jan - 29 - 2026, 04:56 PM | Source : Fela News
UGC के नए नियमों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान अस्थायी रोक लगाई। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि नियमों का दुरुपयोग होने की संभावना क
सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों पर सुनवाई के दौरान अस्थायी रोक लगा दी है। यह रोक UGC के हाल ही में अधिसूचित नियमों के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर लागू हुई है। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि नियमों का दुरुपयोग होने की संभावना है, इसलिए उनकी समीक्षा करना आवश्यक है।
सूत्रों के अनुसार याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि UGC के नए नियम उच्च शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता और समान अवसर के सिद्धांतों के खिलाफ हैं। नियुक्ति प्रक्रिया और प्रशासनिक नियंत्रण से जुड़े प्रावधानों के कारण संस्थानों की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। अदालत ने कहा कि यह देखना जरूरी है कि नियमों से किसी वर्ग या संस्थान को अनुचित लाभ या नुकसान तो नहीं हो रहा।
वहीं दूसरी ओर, केंद्र सरकार और UGC के वकीलों ने यह दावा किया कि नियमों का उद्देश्य शिक्षा में पारदर्शिता बढ़ाना और मानकों को एकरूप करना है। प्रशासन का कहना है कि नियमों से विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में गुणवत्ता सुनिश्चित होगी और छात्रों के हितों की रक्षा होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि उच्च शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी नियमन का दुरुपयोग गंभीर परिणाम दे सकता है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि नियमों के लागू होने से संस्थानों की स्वतंत्रता और छात्र कल्याण पर क्या असर पड़ेगा।
बताया जा रहा है कि अदालत ने मामले की विस्तृत सुनवाई के लिए आगे की तारीख तय की है। पीठ ने संकेत दिया कि नियमों के प्रभाव और उनके दुरुपयोग की संभावना की जांच के बाद ही स्थायी निर्णय लिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से भारत के उच्च शिक्षा क्षेत्र में नीति निर्माण और संस्थानों की स्वायत्तता पर अहम संकेत मिल सकते हैं।
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