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"जूते से पीटूंगी" की धमकी ने मचाया बवाल: दिल्ली स्कूल ऑफ जर्नलिज़्म में छात्रों का फूटा ग़ुस्सा

"जूते से पीटूंगी" की धमकी ने मचाया बवाल: दिल्ली स्कूल ऑफ जर्नलिज़्म में छात्रों का फूटा ग़ुस्सा

Last Updated Apr - 05 - 2025, 03:19 PM | Source : Fela News

"जूते से पीटूंगी" की धमकी ने दिल्ली स्कूल ऑफ जर्नलिज़्म में छात्रों का ग़ुस्सा भड़का दिया। छात्रों ने तीव्र विरोध प्रदर्शन किया, प्रशासन पर उचित कार्रवाई की मां
"जूते से पीटूंगी" की धमकी ने मचाया बवाल

दिल्ली स्कूल ऑफ जर्नलिज़्म (DSJ) में छात्रों और निदेशक के बीच हुआ टकराव अब सोशल मीडिया पर तूल पकड़ चुका है। एक वायरल वीडियो में निदेशक भारती घोरे की कथित धमकी ने विवाद को और भड़का दिया है, वहीं छात्र बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।

वीडियो वायरल, निदेशक पर बुरे बर्ताव का आरोप

“जूते से पीटूंगी” – यही शब्द बने विवाद की जड़।
छात्रों से बातचीत के दौरान भारती घोरे की कथित टिप्पणी का वीडियो वायरल होते ही मामला सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया। वीडियो में वह गुस्से में छात्रों को धमकाते हुए नज़र आती हैं। हालांकि, उन्होंने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।


छात्रों का आरोप – फीस ज़्यादा, सुविधाएं शून्य

बिना लैब, WiFi और एसी के पढ़ाई – क्या ऐसे बनेगा भविष्य?
छात्रों का कहना है कि लाखों रुपये फीस देने के बावजूद संस्थान में जरूरी आधारभूत सुविधाओं का घोर अभाव है। न तो मीडिया लैब काम कर रही है, न ही क्लासरूम में एसी या इंटरनेट की सुविधा है। ऐसे में पत्रकारिता की पढ़ाई कैसे हो?


प्रदर्शन की वजह – सालों से अनसुनी मांगें

छात्रों का कहना है कि उन्होंने पहले भी कई बार शिकायतें दर्ज करवाईं, लेकिन हर बार उन्हें नज़रअंदाज़ कर दिया गया।
अब जब छात्रों ने खुलेआम विरोध जताया तो उन्हें धमकियां सुनने को मिलीं। इससे उनकी नाराजगी और भी बढ़ गई है। उनका मानना है कि अब सिर्फ आश्वासन नहीं, कार्रवाई चाहिए।
सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं

“छात्रों की आवाज़ को दबाने की बजाय उन्हें सुनो” – ऐसे तमाम ट्वीट्स सामने आ रहे हैं।
लोग इस मुद्दे को केवल एक कॉलेज का मामला नहीं, बल्कि पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था से जोड़ रहे हैं। छात्र संगठनों ने भी प्रशासन से जवाबदेही की मांग की है।

क्या बोले अधिकारी?

निदेशक भारती घोरे ने वीडियो को गलत बताया और किसी भी तरह की अभद्रता से इनकार किया।
उनका कहना है कि छात्रों ने वीडियो को तोड़-मरोड़ कर पेश किया है। हालांकि अभी तक विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस विवाद पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी है।

DSJ का यह मामला सिर्फ एक संस्थान की समस्या नहीं, बल्कि यह बताता है कि आज की शिक्षा व्यवस्था में संवाद की कितनी कमी है। छात्रों की जायज़ मांगें और प्रशासन की जवाबदेही के बीच संतुलन बनाना ज़रूरी है, ताकि शिक्षा का मकसद सिर्फ डिग्री तक सीमित न रह जाए।
 

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