Last Updated Jan - 08 - 2026, 03:40 PM | Source : Fela News
सोमनाथ पर हमला केवल लूट था या उसके पीछे धर्म, सत्ता और राजनीतिक मंशा छिपी थी, यह सवाल आज भी इतिहास में गूंजता है।
सोमनाथ मंदिर पर महमूद गजनवी का हमला सिर्फ सोने-चांदी की लालसा का मामला नहीं था। इतिहास के पन्नों में दर्ज इस हमले के पीछे धार्मिक प्रतीक, सत्ता का संदेश और मनोवैज्ञानिक दबदबा जैसी कई परतें छिपी हुई थीं, जिन पर अक्सर खुलकर बात नहीं होती।
11वीं सदी में महमूद गजनवी ने भारत पर कई बार आक्रमण किए। आम तौर पर उसे एक लुटेरे के रूप में याद किया जाता है, जो मंदिरों को तोड़कर धन लूट ले जाता था। लेकिन सोमनाथ मंदिर का मामला बाकी हमलों से अलग माना जाता है। सोमनाथ उस दौर में सिर्फ एक बड़ा शिवमंदिर नहीं था, बल्कि आस्था, शक्ति और समृद्धि का प्रतीक था। अरब यात्रियों और समकालीन विवरणों के मुताबिक, यह मंदिर दूर-दूर तक अपनी भव्यता और प्रतिष्ठा के लिए जाना जाता था।
इतिहासकारों के अनुसार, सोमनाथ में शिव के साथ तीन देवियों की पूजा का भी विशेष महत्व था। ये देवियां समृद्धि, शक्ति और सुरक्षा से जुड़ी मानी जाती थीं। माना जाता है कि इस मंदिर का प्रभाव सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक और राजनीतिक भी था। ऐसे में महमूद गजनवी का यहां हमला एक प्रतीकात्मक कदम भी था, जिससे वह यह दिखाना चाहता था कि स्थानीय शासकों और उनकी आस्था को वह चुनौती दे सकता है।
कई विद्वानों का मानना है कि गजनवी के हमले का मकसद सिर्फ खजाना हासिल करना नहीं, बल्कि इस बात का संदेश देना भी था कि उसकी सत्ता और विचारधारा सर्वोपरि है। सोमनाथ जैसे प्रतिष्ठित स्थल को निशाना बनाकर वह अपने विरोधियों में डर पैदा करना चाहता था। मंदिर को तोड़ना उस दौर में एक तरह से शक्ति प्रदर्शन माना जाता था।
यह भी कहा जाता है कि सोमनाथ पर हमला इसलिए भी खास था क्योंकि यह समुद्र के किनारे स्थित था और व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इलाका माना जाता था। यहां से मिलने वाला धन, प्रतिष्ठा और प्रचार—तीनों ही महमूद गजनवी के लिए फायदेमंद थे। उसके दरबारी इतिहासकारों ने इस हमले को बढ़ा-चढ़ाकर लिखा, ताकि उसे धर्म का रक्षक और विजेता के रूप में पेश किया जा सके।
समय के साथ यह घटना सिर्फ इतिहास नहीं रही, बल्कि राजनीतिक और वैचारिक बहस का विषय बन गई। कुछ लोग इसे सिर्फ लूट और क्रूरता की कहानी मानते हैं, तो कुछ इसे सत्ता और धर्म के टकराव के रूप में देखते हैं। सच शायद इन दोनों के बीच कहीं है।
सोमनाथ मंदिर पर हुआ हमला यह दिखाता है कि इतिहास को एक ही नजरिए से नहीं देखा जा सकता। इसके पीछे केवल धन नहीं, बल्कि प्रतीक, सत्ता और संदेश की गहरी राजनीति भी काम कर रही थी, जिसकी गूंज आज तक सुनाई देती है।