Last Updated Nov - 22 - 2025, 03:59 PM | Source : Fela News
सिंधूर ऑपरेशन के बहाने छिपे बड़े रणनीतिक खेल की चर्चा तेज है। खुफिया रिपोर्टों में दावा है कि चीन ने हालात का फायदा उठाकर भारत-पाक तनाव को अपने परीक्षण मैदान जै
एक हालिया रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच चली सीमित जंग को चीन ने अपने हथियारों के परीक्षण का सुनहरा मौका मान लिया। इस ऑपरेशन के दौरान कई आधुनिक चीनी सिस्टम की मौजूदगी सामने आई है।
ऑपरेशन ‘सिंदूर’ से जुड़े नए इनपुट ने सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य तनाव के दौरान चीन ने हालात का फायदा उठाकर अपने नए हथियारों और तकनीकों का परीक्षण किया। जिस जंग ने भारत और पाकिस्तान की सीमाओं को गर्म किया, उसी को चीन ने रणनीतिक प्रयोगशाला की तरह इस्तेमाल किया।
खुलासे के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना को चीन ने उस समय कई तरह के आधुनिक सैन्य उपकरण उपलब्ध कराए थे, जिनमें सर्विलांस ड्रोन, लॉन्ग-रेंज रडार और कुछ उन्नत आर्टिलरी सिस्टम भी शामिल थे। माना जा रहा है कि चीन इन हथियारों की परफॉर्मेंस, रेंज और प्रभाव को रियल कॉम्बैट में परखना चाहता था। वास्तविक युद्ध से बेहतर कोई परीक्षण वातावरण नहीं होता और पाकिस्तान उस समय चीन के लिए बिल्कुल ऐसा ही मंच बन गया।
सेना से जुड़े सूत्र बताते हैं कि पाकिस्तान द्वारा इस्तेमाल किए गए कुछ ड्रोन और सिस्टम चीन के नए प्रोटोटाइप मॉडल थे, जिन्हें पहले सीमित ट्रायल मिला था। लेकिन ऑपरेशन सिंधूर के दौरान इन्हें वास्तविक परिस्थितियों में उपयोग किया गया। भारत ने भी इन गतिविधियों को ट्रैक किया और कई ऐसे सिग्नल पकड़े जो चीन की अप्रत्यक्ष संलिप्तता की ओर इशारा करते थे।
यह खुलासा इसलिए भी गंभीर है क्योंकि इससे साफ होता है कि चीन न सिर्फ पाकिस्तान को सैन्य मदद देता है, बल्कि दक्षिण एशिया के तनाव को अपने रणनीतिक हितों के लिए भी इस्तेमाल करता है। भारतीय विशेषज्ञों का मानना है कि चीन ने इस मौके पर यह भी आकलन किया कि भारतीय सेना नई चुनौतियों और तकनीकी खतरों का कैसे सामना करती है।
रिपोर्ट का दूसरा पहलू यह भी है कि पाकिस्तान की सेना इस समर्थन के बिना जंग में तकनीकी बढ़त हासिल नहीं कर पाती। इससे भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने यह अंदाजा लगाया कि भविष्य में किसी भी सीमा-गत संघर्ष में चीन की छाया पाकिस्तान के साथ मौजूद रहेगी।
ऑपरेशन सिंधूर से जुड़े ये खुलासे दक्षिण एशिया की सुरक्षा समीकरण को एक नए नजरिए से समझने का संकेत देते हैं। चीन की भागीदारी केवल सहयोग तक सीमित नहीं, बल्कि रणनीतिक प्रयोगों तक फैली हुई है, जिसका असर आने वाले समय में भारत की सैन्य तैयारी और नीति दोनों पर दिख सकता है।