Last Updated Nov - 18 - 2025, 05:36 PM | Source : Fela News
लालू की सक्रियता से RJD में नई हलचल, तेजस्वी पर दबाव और पार्टी एकजुटता पर ध्यान।
बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है क्योंकि लालू प्रसाद यादव अचानक सक्रिय दिखाई देने लगे हैं। लंबे समय से बीमार चल रहे लालू का इस तरह सामने आना कई सवाल खड़े करता है, खासकर उस समय जब तेजस्वी यादव पार्टी और परिवार दोनों मोर्चों पर दबाव झेल रहे हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या लालू की वापसी RJD के अंदर बढ़ती दरारों को भर पाएगी।
तेजस्वी यादव हाल के दिनों में लगातार चुनौतियों से घिरे हुए थे। पार्टी में मतभेद, परिवार के भीतर टकराव और विपक्ष के राजनीतिक हमले, तीनों ने माहौल को काफी पेचीदा बना दिया था। खासकर कुछ पारिवारिक मसलों को लेकर जिस तरह बयानबाज़ी सामने आई, उसने तेजस्वी की छवि पर असर डाला। इसी बीच लालू का अचानक सक्रिय होना कई लोगों को एक संकेत जैसा लगा कि अब वह खुद मोर्चा संभालने को तैयार हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक हाल ही में हुई RJD बैठकों में लालू ने सीधा दखल दिया और कई मुद्दों पर अपनी राय भी स्पष्ट की। पार्टी में उनके अनुभव और पकड़ को देखते हुए नेता भी उनकी बातों को वजन दे रहे हैं। तेजस्वी के लिए भी यह राहत की बात है कि पिता का समर्थन खुलकर सामने आया है, क्योंकि विरोधी दल लगातार उन पर परिवार में कमजोर पकड़ का आरोप लगा रहे थे।
लालू की सक्रियता को RJD के अंदरूनी संतुलन से भी जोड़कर देखा जा रहा है। परिवार के भीतर हाल में जिस तरह कुछ संपत्ति और राजनीतिक दावेदारी से जुड़े मसले चर्चा में आए, उससे पार्टी समर्थकों में भ्रम की स्थिति बन रही थी। लालू की मौजूदगी इन टकरावों को शांत करने में मदद कर सकती है, क्योंकि वह सभी बच्चों पर समान पकड़ रखते हैं और फैसले लेने की क्षमता भी उनमें ही सबसे ज्यादा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लालू की वापसी RJD के लिए दोधारी तलवार भी हो सकती है। एक तरफ जहां उनका अनुभव और करिश्मा पार्टी को अंदर से मजबूत कर सकता है, वहीं विपक्ष इसे पुराने दौर में लौटने का तंज भी बना सकता है। लेकिन मौजूदा हालात में RJD के लिए सबसे जरूरी है आंतरिक एकता, और यह काम फिलहाल लालू से बेहतर कोई नहीं कर सकता।
अब सबकी नजर इस पर रहेगी कि लालू की सक्रियता कितने समय तक जारी रहती है और क्या वह तेजस्वी को मौजूदा संकट से बाहर निकाल पाते हैं। क्योंकि बिहार की सियासत में एक बात तो तय है, जब भी लालू मैदान में उतरते हैं, खेल बदलता जरूर है।
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