Last Updated Apr - 11 - 2026, 01:26 PM | Source : Fewla News
महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती पर पीएम मोदी ने श्रद्धांजलि दी, इसी दौरान राहुल गांधी से मुलाकात हुई, दोनों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं
देश की राजनीति में जहां अक्सर तीखी बहस और टकराव देखने को मिलता है, वहीं शनिवार को संसद परिसर में एक अलग ही तस्वीर सामने आई। महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी आमने-सामने आए और कुछ देर बातचीत भी की। इस मुलाकात की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं
प्रधानमंत्री मोदी संसद परिसर स्थित प्रेरणा स्थल पहुंचे, जहां उन्होंने महान समाज सुधारक ज्योतिराव फुले को पुष्पांजलि अर्पित की। इस मौके पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, राज्यसभा के पूर्व उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह समेत कई नेता मौजूद थे
इसी दौरान पीएम मोदी और राहुल गांधी के बीच कुछ पल की बातचीत भी हुई। दोनों नेताओं को एक साथ बातचीत करते देख लोगों ने इसे लोकतंत्र की खूबसूरत तस्वीर बताया। खास बात यह है कि हाल ही में खत्म हुए संसद सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिली थी। ऐसे माहौल के बीच यह मुलाकात एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखी जा रही है।
पीएम मोदी ने फुले को बताया सामाजिक न्याय का अग्रदूत
प्रधानमंत्री मोदी ने महात्मा फुले को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें समाज में समानता और शिक्षा के प्रसार का प्रतीक बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि फुले ने अपना जीवन न्याय, समानता और शिक्षा के लिए समर्पित किया। खासकर महिलाओं और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए उनका योगदान ऐतिहासिक रहा है।
कौन थे महात्मा ज्योतिबा फुले?
महात्मा ज्योतिराव फुले को भारत के महान समाज सुधारकों में गिना जाता है। वे महाराष्ट्र से थे और उन्होंने जाति व्यवस्था और सामाजिक भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई। साल 1848 में उन्होंने देश का पहला लड़कियों का स्कूल शुरू किया, जो उस समय एक क्रांतिकारी कदम था।
उन्होंने सत्यशोधक समाज की स्थापना की, जिसका उद्देश्य समाज में बराबरी और न्याय को बढ़ावा देना था। फुले को ‘महात्मा’ की उपाधि महात्मा गांधी द्वारा दी गई थी।
सियासत से ऊपर दिखी शिष्टता
पीएम मोदी और राहुल गांधी की यह मुलाकात सिर्फ एक औपचारिक बातचीत नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र में आपसी सम्मान की झलक के तौर पर देखी जा रही है। यह तस्वीर यह भी दिखाती है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद व्यक्तिगत स्तर पर संवाद और शिष्टाचार कायम रह सकता है।
अब यह मुलाकात राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है और लोग इसे सकारात्मक राजनीति की एक मिसाल के रूप में देख रहे हैं।
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