Last Updated Nov - 15 - 2025, 12:08 PM | Source : Fela News
बिहार चुनाव के नतीजों के बाद RJD के भीतर और बाहर दोनों जगह हलचल बढ़ गई है। परिणामों ने तेजस्वी यादव के सामने पार्टी, परिवार, गठबंधन और राजनीतिक भविष्य, चारों मो
बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन के कमजोर प्रदर्शन का सबसे बड़ा राजनीतिक असर तेजस्वी यादव पर पड़ा है। RJD भले अभी भी विपक्ष की सबसे बड़ी ताकत हो, लेकिन परिणामों ने पार्टी नेतृत्व के अंदर सवाल और असंतोष दोनों को हवा दे दी है। कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि RJD अपनी रणनीति और प्रचार में जितनी आक्रामक दिखी, उतना फायदा उसे नहीं मिल पाया।
इसके साथ ही पार्टी के भीतर युवा और पुराने नेताओं के बीच एक नया तनाव भी उभर रहा है। कुछ नेता तेजस्वी की टीम को जमीन से कटे होने का आरोप लगा रहे हैं, जबकि युवा नेता मानते हैं कि बदलाव की दिशा में पार्टी को और तेजी से कदम बढ़ाने चाहिए।
परिवार की राजनीति भी इस समय तेजस्वी के लिए कम चुनौती नहीं है। लालू परिवार हमेशा सुर्खियों में रहा है, लेकिन इस हार ने परिवार के भीतर भूमिकाओं को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। तेजस्वी को अब यह साबित करना होगा कि वे न केवल पार्टी बल्कि परिवार की एकता को भी बनाए रख सकते हैं।
इसी बीच, गठबंधन की राजनीति भी उनके लिए मुश्किल बन गई है। महागठबंधन में कांग्रेस और वाम दलों के साथ तालमेल पहले से ही कमजोर था, और चुनाव परिणामों के बाद यह दूरी और बढ़ सकती है। सीट बंटवारे, संदेश और संगठन—तीनों ही स्तरों पर महागठबंधन की कमजोरियां सामने आ चुकी हैं।
सबसे बड़ी चुनौती तेजस्वी के व्यक्तिगत राजनीतिक भविष्य से जुड़ी है। वे लंबे समय से खुद को एक मजबूत विकल्प के रूप में पेश करते आए हैं, लेकिन इस चुनाव ने उनके नेतृत्व की क्षमता पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्हें अब यह दिखाना होगा कि वे न सिर्फ चुनाव लड़ने बल्कि हार के बाद पूरी पार्टी को फिर से खड़ा करने की क्षमता रखते हैं।
बिहार की राजनीति में यह दौर उनके लिए निर्णायक साबित हो सकता है। यदि वे पार्टी, परिवार और गठबंधन—तीनों को संतुलित रखते हुए नई रणनीति बना पाते हैं, तो वे फिर से मजबूत होकर वापसी कर सकते हैं। लेकिन अगर यह संतुलन बिगड़ता है, तो आने वाले वर्षों में RJD की दिशा और तेजस्वी की भूमिका दोनों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
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