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मुंबई की सियासत अब किस करवट बैठेगी

मुंबई की सियासत अब किस करवट बैठेगी

Last Updated Jan - 13 - 2026, 03:39 PM | Source : Fela News

बीएमसी चुनाव से पहले आज प्रचार का शोर थम जाएगा। 15 जनवरी को होने वाली वोटिंग में 227 सीटों के लिए 1700 से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में हैं, जिससे मुकाबला बेहद दिल
मुंबई की सियासत अब किस करवट बैठेगी
मुंबई की सियासत अब किस करवट बैठेगी

बृहन्मुंबई महानगरपालिका यानी बीएमसी चुनाव के लिए आज प्रचार अभियान थम जाएगा। पिछले कई दिनों से मुंबई की गलियों, चौराहों और सोशल मीडिया पर सियासी गहमागहमी देखने को मिल रही थी, जो अब चुनावी नियमों के तहत शांत हो जाएगी। 15 जनवरी को शहर की राजनीति का भविष्य तय होगा, जब मतदाता अपने वोट का इस्तेमाल करेंगे।

इस बार बीएमसी की 227 सीटों के लिए करीब 1700 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। बड़ी पार्टियों के साथ-साथ निर्दलीय उम्मीदवारों की भी अच्छी-खासी मौजूदगी है, जिससे मुकाबला और रोचक बन गया है। हर वार्ड में स्थानीय मुद्दों को लेकर तीखी टक्कर देखने को मिल रही है। पानी, सड़क, सफाई, ट्रैफिक और बुनियादी सुविधाएं इस चुनाव के बड़े मुद्दे बने हुए हैं।

बीएमसी को देश की सबसे अमीर नगरपालिकाओं में गिना जाता है, इसलिए इस चुनाव का राजनीतिक महत्व काफी ज्यादा है। यही वजह है कि सभी प्रमुख दलों ने पूरी ताकत झोंक दी थी। रोड शो, जनसभाएं और घर-घर संपर्क अभियान के जरिए मतदाताओं को साधने की कोशिश की गई। अब फैसला जनता के हाथ में है।

चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार प्रचार थमने के बाद किसी भी तरह की सार्वजनिक सभा, रैली या वोट मांगने की अनुमति नहीं होगी। हालांकि उम्मीदवार और उनके समर्थक अब भी अंतिम समय में अंदरूनी बैठकों और रणनीति पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।

15 जनवरी को मतदान के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जाएगी ताकि वोटिंग शांतिपूर्ण ढंग से हो सके। प्रशासन ने मतदाताओं से अपील की है कि वे बिना डर और दबाव के मतदान करें।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार का बीएमसी चुनाव कई मायनों में अलग है। बदलती सियासी समीकरणों और नए चेहरों की मौजूदगी ने मुकाबले को अनिश्चित बना दिया है। कुछ सीटों पर कड़ा संघर्ष देखने को मिल सकता है, जबकि कुछ वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार भी खेल बिगाड़ सकते हैं।

अब सबकी नजर 15 जनवरी पर टिकी है। प्रचार थम चुका होगा, लेकिन शहर में सियासी चर्चाएं जारी रहेंगी। मुंबई का अगला नगर निगम किसके हाथ जाएगा, इसका फैसला अब जनता के एक वोट से तय होगा।

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