Last Updated Nov - 26 - 2025, 01:52 PM | Source : Fela News
कांग्रेस सरकार के भीतर बढ़ते तनाव ने माहौल गर्म कर दिया है, लेकिन ऊपर की ओर पूरी खामोशी छाई है।
कर्नाटक कांग्रेस में इन दिनों हलचल तेज है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के बीच खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। दोनों गुटों के समर्थक लगातार दिल्ली पहुंच रहे हैं, अपनी-अपनी शिकायतें लेकर। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े विवाद के बावजूद पार्टी का हाईकमान—राहुल गांधी और अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूरी तरह चुप हैं। यही चुप्पी अब सियासी सवाल बनने लगी है।
पिछले कुछ दिनों में कई विधायक दिल्ली पहुंचे और हाईकमान को संदेश दिया कि सरकार के भीतर असंतोष बढ़ रहा है। डीके शिवकुमार गुट के नेता लगातार यह दबाव बना रहे हैं कि सत्ता में उनके योगदान को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है। वहीं सिद्धारमैया गुट का कहना है कि सरकार स्थिर है और कुछ लोग बिना वजह विवाद खड़ा कर रहे हैं।
स्थिति इतनी बढ़ गई कि विधायक बैचों में दिल्ली पहुंचने लगे, जिससे ये संकेत मिलने लगे कि कांग्रेस के भीतर बड़ा फूट पड़ सकता है। इसके बावजूद केंद्रीय नेतृत्व की प्रतिक्रिया बेहद धीमी रही। न कोई सख्त संदेश जारी हुआ और न ही दोनों पक्षों को एक मंच पर लाने की कोई ठोस कोशिश दिखी।
पार्टी के अंदर इस चुप्पी को कई तरह से समझा जा रहा है, कुछ मानते हैं कि राहुल गांधी जानबूझकर टकराव से दूर रहना चाहते हैं ताकि बाद में संतुलित फैसला ले सकें, जबकि कुछ का कहना है कि हाईकमान की पकड़ अब राज्यों पर पहले जैसी नहीं रही।
इस राजनीतिक खींचतान का असर सीधे कर्नाटक सरकार की स्थिरता पर पड़ रहा है। अगर विवाद इसी तरह बढ़ता रहा, तो सरकार पर दबाव और गहरा सकता है। कांग्रेस के लिए यह बड़ा संकट इसलिए भी है क्योंकि कर्नाटक फिलहाल उसका सबसे महत्वपूर्ण राज्य है, जहां सत्ता में रहना 2024 के बाद उसकी राजनीतिक साख के लिए बेहद ज़रूरी माना जाता है।
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