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बाबरी जैसी इमारत बनाने की जल्दी क्यों थी…

बाबरी जैसी इमारत बनाने की जल्दी क्यों थी…

Last Updated Dec - 06 - 2025, 03:59 PM | Source : Fela News

मुर्शिदाबाद में बाबरी शैली मस्जिद निर्माण घोषणा ने बंगाल में राजनीति और विवाद को तेज किया।
बाबरी जैसी इमारत बनाने की जल्दी क्यों थी…
बाबरी जैसी इमारत बनाने की जल्दी क्यों थी…

मुर्शिदाबाद में टीएमसी से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर द्वारा बाबरी मस्जिद जैसे ढांचे की नींव रखने से राजनीतिक माहौल अचानक गर्म हो गया। समर्थकों की भीड़, ईंटों का ढेर और तेज नारों के बीच हुए इस कार्यक्रम ने पूरे बंगाल में हलचल मचा दी है।

घटना शुक्रवार की है, जब हुमायूं कबीर अपने समर्थकों के साथ मुर्शिदाबाद पहुंचे और वहां एक ऐसी मस्जिद के निर्माण की घोषणा की, जिसका ढांचा बाबरी मस्जिद की शैली से मिलता-जुलता बताया जा रहा है। कार्यक्रम के लिए बड़ी संख्या में लोग ईंटें और सामग्री लेकर पहुंचे थे। कबीर ने मंच से कहा कि यह निर्माण “धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान” को सशक्त करने का प्रतीक होगा।

कबीर पहले से ही टीएमसी से निलंबित चल रहे हैं, ऐसे में उनके इस कदम को राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। स्थानीय प्रशासन इस कार्यक्रम से अनजान होने की बात कह रहा है। अधिकारियों के अनुसार, किसी भी नए धार्मिक ढांचे के निर्माण के लिए अनुमति जरूरी होती है, लेकिन इस कार्यक्रम की जानकारी आधिकारिक चैनलों तक पहुंची ही नहीं। अब प्रशासन पूरी घटना की जांच में जुट गया है।

घटना के बाद से बीजेपी और टीएमसी दोनों ओर से बयानबाजी तेज हो गई है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि यह कदम जानबूझकर सांप्रदायिक तनाव भड़काने की कोशिश है। वहीं टीएमसी ने दूरी बनाते हुए कहा कि कबीर पार्टी से निलंबित हैं और उनका कोई भी कदम पार्टी की नीति से संबंधित नहीं है।

स्थानीय लोगों में भी इस मामले को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं हैं। कुछ लोगों का कहना है कि धार्मिक ढांचे को लेकर इतना बड़ा प्रदर्शन अनावश्यक था, जबकि समर्थक इसे अपनी धार्मिक पहचान की मजबूती के रूप में देख रहे हैं। कार्यक्रम में मौजूद भीड़ और सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो से पता चलता है कि आयोजन काफी योजनाबद्ध था और इसका उद्देश्य राजनीतिक संदेश देना भी हो सकता है।

कबीर ने हालांकि अपने बयान में कहा कि उनका मकसद “समाज को जोड़ना” है, लेकिन जिस ढांचे की तुलना बाबरी मस्जिद से की जा रही है, उसने विवाद को और गहरा कर दिया है। प्रशासन ने अब भूमि की स्थिति, निर्माण की अनुमति पर जमा भीड़ के आधार पर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।

कुल मिलाकर, मुर्शिदाबाद का यह मामला धार्मिक प्रतीक, राजनीति और स्थानीय अस्थिरता का मिश्रण बन गया है, जिसने पूरे बंगाल में नए सिरे से बहस छेड़ दी है।

 

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