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असम में प्रियंका का दांव क्या बदल पाएगा खेल

असम में प्रियंका का दांव क्या बदल पाएगा खेल

Last Updated Jan - 13 - 2026, 02:50 PM | Source : Fela News

कांग्रेस ने असम चुनाव की कमान प्रियंका गांधी को सौंपकर साफ संकेत दे दिया है कि पार्टी अब पुराने तरीकों से नहीं, नए चेहरे और नई रणनीति के साथ मैदान में उतरना चाह
असम में प्रियंका का दांव क्या बदल पाएगा खेल
असम में प्रियंका का दांव क्या बदल पाएगा खेल

असम विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने बड़ा फैसला लेते हुए प्रियंका गांधी को चुनावी रणनीति की अहम जिम्मेदारी सौंपी है। यह कदम सिर्फ एक चेहरा आगे करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए पार्टी कई सियासी संदेश एक साथ देना चाहती है। लंबे समय से असम में कमजोर होती कांग्रेस अब बीजेपी और मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के मजबूत नेतृत्व को सीधी चुनौती देने की तैयारी में है।

प्रियंका गांधी को आगे लाने की पहली वजह उनकी जनसंपर्क क्षमता मानी जा रही है। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि प्रियंका जमीन पर उतरकर कार्यकर्ताओं में जान फूंक सकती हैं। असम में पार्टी संगठन लंबे समय से बिखरा हुआ दिखता रहा है और गुटबाजी भी बड़ी समस्या रही है। प्रियंका को ऐसे नेता के तौर पर देखा जा रहा है जो संगठन को एकजुट कर सकती हैं।

दूसरी बड़ी वजह महिला और युवा वोटर्स हैं। प्रियंका गांधी की छवि एक सॉफ्ट लेकिन आक्रामक नेता की है, जो महिलाओं और युवाओं से सीधे संवाद कर सकती हैं। असम में रोजगार, महंगाई और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर कांग्रेस इन्हीं वर्गों को साधना चाहती है। प्रियंका के नेतृत्व में पार्टी इन मुद्दों को भावनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर उठाने की योजना बना रही है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह फैसला हिमंता बिस्वा सरमा के मजबूत प्रचार तंत्र का जवाब भी है। हिमंता की आक्रामक राजनीति और तेज फैसलों के सामने कांग्रेस को एक ऐसा चेहरा चाहिए था जो चर्चा में बना रहे और बीजेपी के नैरेटिव को चुनौती दे सके। प्रियंका गांधी का नाम खुद में एक राजनीतिक ब्रांड है, जिससे मीडिया और जनता का ध्यान खींचा जा सकता है।

इसके अलावा, कांग्रेस असम में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए नए प्रयोग करना चाहती है। पार्टी जानती है कि सिर्फ स्थानीय नेताओं के भरोसे चुनाव जीतना मुश्किल है। प्रियंका की मौजूदगी से राष्ट्रीय नेतृत्व का सीधा दखल दिखेगा, जिससे कार्यकर्ताओं को यह संदेश जाएगा कि पार्टी असम को हल्के में नहीं ले रही।

हालांकि यह भी सच है कि प्रियंका गांधी के सामने चुनौती आसान नहीं होगी। असम में बीजेपी का संगठन मजबूत है और सरकार अपने कामों का लगातार प्रचार कर रही है। ऐसे में प्रियंका को सिर्फ भाषणों तक सीमित नहीं रहना होगा, बल्कि जमीनी मुद्दों पर साफ और असरदार रणनीति बनानी होगी।

कुल मिलाकर, असम चुनाव की कमान प्रियंका गांधी को सौंपना कांग्रेस का सोचा-समझा दांव है। यह फैसला पार्टी के लिए आखिरी बड़ा प्रयोग भी माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि यह रणनीति कांग्रेस को फिर से मुकाबले में लाती है या सिर्फ एक राजनीतिक संदेश बनकर रह जाती है।

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