Last Updated Oct - 28 - 2025, 05:41 PM | Source : Fela News
सरकारी जगहों पर RSS की बढ़ती मौजूदगी को लेकर चर्चा तेज। क्या फिर से शुरू होंगी संगठन की गतिविधियां? राजनीतिक गलियारों में इस कदम को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं
कर्नाटक में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसके तहत सरकारी परिसरों में कार्यक्रम आयोजित करने से पहले अनुमति लेना जरूरी किया गया था. कोर्ट के इस फैसले के बाद राज्य में आरएसएस जैसी संगठनों की गतिविधियां फिर से चर्चा में आ गई हैं।
दरअसल, कुछ हफ्ते पहले कर्नाटक सरकार ने एक आदेश जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि किसी भी सरकारी या सार्वजनिक परिसर में किसी संगठन को कार्यक्रम करने के लिए प्रशासनिक अनुमति लेनी होगी. इस आदेश को कई संगठनों ने “पक्षपातपूर्ण” बताते हुए चुनौती दी थी।
मामला हाईकोर्ट पहुंचा और अदालत ने फिलहाल सरकार के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी. कोर्ट ने कहा कि इस तरह का प्रतिबंध संविधान में दी गई स्वतंत्रता का उल्लंघन माना जा सकता है. अब जब तक मामले की पूरी सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक इस आदेश को लागू नहीं किया जाएगा।
बताया जा रहा है कि सरकार का यह कदम आरएसएस से जुड़ी गतिविधियों को सीमित करने के उद्देश्य से लिया गया था, क्योंकि कई बार सरकारी स्कूलों और कार्यालय परिसरों में आरएसएस से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. वहीं, विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने इसे “राजनीतिक दखल” बताया था।
अब कोर्ट के फैसले के बाद आरएसएस समर्थकों और अन्य संगठनों में खुशी देखी जा रही है. उनका कहना है कि यह निर्णय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और समानता के अधिकार को मजबूत करता है।
कर्नाटक सरकार ने हालांकि साफ किया है कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक व्यवस्था थी, किसी संगठन को निशाना बनाने का इरादा नहीं था. अब देखना यह होगा कि आगे की सुनवाई में कोर्ट इस मामले को किस दिशा में ले जाता है—क्या सरकार का प्रतिबंध कायम रहेगा या सरकारी परिसरों में फिर खुले तौर पर कार्यक्रम आयोजित किए जा सकेंगे?