Last Updated Jan - 30 - 2026, 11:08 AM | Source : Fela News
Pearl Formation: मोती एक प्राकृतिक और दुर्लभ रत्न माना जाता है। ऐसे में यह जानना दिलचस्प है कि आखिर समुद्र में मोती कैसे बनता है और इसकी पूरी प्रक्रिया क्या होत
Pearl Formation: मोती पृथ्वी पर पाए जाने वाले सबसे आकर्षक प्राकृतिक रत्नों में से एक हैं। खास बात यह है कि इन्हें चट्टानों से नहीं निकाला जाता, बल्कि ये पानी के भीतर जीवित जीवों द्वारा बनाए जाते हैं। हीरे और सोने के विपरीत, मोती सीप और मसल्स जैसे मोलस्क के अंदर एक प्राकृतिक रक्षा प्रक्रिया के तहत बनते हैं।
बाहरी कण से होती है शुरुआत
मोती बनने की प्रक्रिया तब शुरू होती है, जब रेत का कोई दाना, छोटा पत्थर या कोई अन्य कण गलती से मोलस्क के मुलायम ऊतकों में प्रवेश कर जाता है। इससे मोलस्क को जलन और परेशानी होती है, क्योंकि वह इस कण को अपने शरीर से आसानी से निकाल नहीं सकता।
प्राकृतिक रक्षा तंत्र होता है सक्रिय
इस जलन से बचने के लिए मोलस्क अपना प्राकृतिक रक्षा तंत्र सक्रिय कर देता है। वह बाहरी कण को बाहर निकालने के बजाय उसे ढकना शुरू कर देता है। इसके लिए मोलस्क ‘नेकर’ नामक एक चिकना और चमकदार पदार्थ छोड़ता है, जिसे मदर ऑफ पर्ल कहा जाता है। यह मुख्य रूप से कैल्शियम कार्बोनेट और कोंचिओलिन से बना होता है।
समय के साथ बनता है मोती
नेकर की परतें धीरे-धीरे बाहरी कण के चारों ओर जमा होती जाती हैं। ये हजारों सूक्ष्म परतें महीनों या कई वर्षों में बनती हैं, जिससे कण एक पूर्ण मोती का रूप ले लेता है। मोती का आकार, चिकनाई और चमक इस बात पर निर्भर करती है कि ये परतें कितनी समान और व्यवस्थित तरीके से जमा हुई हैं।
मोती क्यों होते हैं दुर्लभ?
प्राकृतिक मोती बनना एक दुर्लभ घटना है, क्योंकि यह पूरी तरह संयोग पर निर्भर करता है। इसी कारण ये बेहद मूल्यवान होते हैं। आज बाजार में मिलने वाले अधिकतर मोती ‘कल्चर्ड पर्ल’ होते हैं, जिन्हें इंसान सीप में एक छोटा सा न्यूक्लियस डालकर नियंत्रित परिस्थितियों में इस प्राकृतिक प्रक्रिया को शुरू कर बनाता है।
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