Last Updated Oct - 18 - 2025, 12:26 PM | Source : Fela News
Yamraj Death Story: यमराज को मृत्यु का देवता माना जाता है, लेकिन पुराणों में ऐसा वर्णन है जब यमराज खुद अपनी मौत का सामना करने लगे।
Yamraj Death Story: हिंदू धर्म में यमराज को मृत्यु का देवता माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि किसी भी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी आत्मा यमलोक जाती है, जहां यमराज उसे उसके अच्छे और बुरे कर्मों के आधार पर स्वर्ग या नरक भेजते हैं। यमराज ही जीवों के कर्मों के अनुसार जीवन और मृत्यु का हिसाब रखते हैं।
लेकिन पुराणों में एक घटना का वर्णन है, जब यमराज को खुद अपनी मृत्यु का सामना करना पड़ा। इस दौरान यमराज ने महसूस किया कि जीवन और मृत्यु भगवान की इच्छा से ही होती है, और वे केवल माध्यम हैं, अंतिम निर्णयकर्ता नहीं। यह अनुभव यमराज के लिए आत्मबोध का क्षण था। यह घटना भगवान शिव की योजना से हुई थी।
कथा के अनुसार, कालंजर में शिवभक्त राजा श्वेत रहते थे। वृद्ध होने पर उन्होंने राजपाट अपने बेटे को सौंपा और गोदावरी नदी के किनारे एक गुफा में शिव की आराधना में लीन हो गए। वे महामुनि श्वेत बन गए।
मुनि श्वेत के मृत्यु का समय आने पर यमदूत उन्हें ले जाने आए। लेकिन शिवगण और भैरव ने मुनि की रक्षा की। यमराज क्रोधित होकर यमदंड लेकर आए और मुनि को ले जाने लगे। तब सेनापति कार्तिकेय ने यमराज पर प्रहार किया, जिससे यमराज की मृत्यु हो गई।
यमराज की मृत्यु की खबर सुनकर सूर्य देव शिवजी के पास गए और प्रार्थना की। शिव ने यमुना का जल यमराज के शरीर पर छिड़क दिया, जिससे यमराज पुनर्जीवित हो गए।