Last Updated Jan - 19 - 2026, 02:53 PM | Source : Fela News
टी20 में टीम इंडिया का आत्मविश्वास दिखता है, लेकिन जैसे ही बात वनडे और टेस्ट की आती है, नतीजे सवाल खड़े करने लगते हैं। गौतम गंभीर का कोचिंग रिकॉर्ड अब बहस का मु
टीम इंडिया के हेड कोच के तौर पर गौतम गंभीर का सफर उतार-चढ़ाव से भरा नजर आ रहा है। टी20 फॉर्मेट में टीम का प्रदर्शन संतोषजनक रहा है और खिलाड़ी आक्रामक व आत्मविश्वास से भरा खेल दिखाते नजर आए हैं। लेकिन वनडे और टेस्ट क्रिकेट में वही टीम बार-बार लय खोती दिख रही है। हालिया भारत-न्यूजीलैंड वनडे सीरीज के बाद यह सवाल और तेज हो गया है कि क्या गंभीर की रणनीति लंबे फॉर्मेट में काम नहीं कर पा रही।
टी20 क्रिकेट में गंभीर की सोच साफ नजर आती है। तेज फैसले, युवा खिलाड़ियों पर भरोसा और आक्रामक अप्रोच ने टीम को फायदा पहुंचाया है। बल्लेबाजी में गहराई और गेंदबाजी में लगातार बदलाव विरोधी टीमों को दबाव में डालते रहे हैं। यही वजह है कि छोटे फॉर्मेट में टीम इंडिया अपेक्षाकृत बेहतर नजर आई है।
लेकिन वनडे और टेस्ट में कहानी बदल जाती है। इन फॉर्मेट्स में संयम, रणनीतिक धैर्य और मैच को लंबे समय तक पढ़ने की जरूरत होती है। कई मौकों पर टीम चयन को लेकर सवाल उठे हैं। कुछ खिलाड़ियों को बार-बार मौके मिले, जबकि कुछ फॉर्म में होते हुए भी बाहर बैठे रहे। बल्लेबाजी क्रम में अस्थिरता और गेंदबाजी बदलाव में देरी जैसी बातें टीम को भारी पड़ी हैं।
भारत-न्यूजीलैंड वनडे मुकाबलों में यह साफ दिखा कि टीम दबाव में सही फैसले नहीं ले पाई। मिडिल ऑर्डर की कमजोरी और पावरप्ले के बाद रन गति बनाए रखने में दिक्कत सामने आई। टेस्ट क्रिकेट में भी टीम कई बार मजबूत स्थिति से मैच हाथ से निकलने देती दिखी है, जो कोचिंग रणनीति पर सवाल खड़े करता है।
क्रिकेट जानकारों का मानना है कि गंभीर का माइंडसेट टी20 के लिए ज्यादा अनुकूल है। वह तेज रिजल्ट और आक्रामक क्रिकेट के समर्थक हैं, लेकिन टेस्ट और वनडे में यही सोच कभी-कभी नुकसान पहुंचा देती है। इन फॉर्मेट्स में अनुभव और परिस्थिति के हिसाब से खेल बदलना जरूरी होता है, जो अब तक पूरी तरह नजर नहीं आया है।
हालांकि यह भी सच है कि गंभीर को अभी लंबा समय नहीं मिला है। किसी भी कोच की असली परीक्षा वक्त के साथ होती है। टीम ट्रांजिशन के दौर से गुजर रही है और युवा खिलाड़ियों को सेट होने में समय लग सकता है। लेकिन भारतीय टीम से उम्मीदें हमेशा बड़ी रहती हैं, और इसी वजह से नतीजों पर सवाल भी उतने ही सख्त होते हैं।
फिलहाल तस्वीर यही कहती है कि टी20 में पास मार्क्स मिल रहे हैं, लेकिन वनडे और टेस्ट में गंभीर का गणित अभी गड़बड़ाया हुआ है। आने वाली सीरीज तय करेंगी कि यह सिर्फ शुरुआती झटका था या वाकई टीम इंडिया को अपनी दिशा बदलने की जरूरत है।
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