Last Updated Sep - 11 - 2025, 04:59 PM | Source : Fela News
जब दिल की धड़कन तेज होती है तो स्मार्टवॉच तुरंत पकड़ लेती है और नोटिफिकेशन भेज देती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये टेक्नोलॉजी असल में कैसे काम करती है?
आजकल ज्यादातर स्मार्टवॉच में हार्ट रेट ट्रैकिंग फीचर होता है। अब तो स्मार्ट रिंग और एयरपॉड्स में भी यह फीचर आने लगा है। हार्ट रेट से पता चलता है कि दिल कितनी अच्छी तरह ब्लड पंप कर रहा है और शरीर को ऑक्सीजन पहुंचा रहा है। लेकिन क्या आपने सोचा है कि ये डिवाइस हार्ट रेट मापते कैसे हैं? आइए जानते हैं।
कैसे काम करती है ये तकनीक?
स्मार्टवॉच के पीछे हरी (ग्रीन) लाइट चमकती है और साथ ही एक ऑप्टिकल सेंसर लगा होता है। खून हरी रोशनी को आसानी से सोख लेता है। खून से टकराकर जो रोशनी वापस आती है, उसे सेंसर पकड़ लेता है। इसी आधार पर हार्ट रेट मापा जाता है।
फोटोप्लेथिस्मोग्राफी (PPG) तकनीक
जब दिल धड़कता है तो खून नसों में तेजी से बहता है और नसें फूल जाती हैं। इस समय ज्यादा ग्रीन लाइट अब्जॉर्ब होती है। जब दिल रिलैक्स होता है तो खून का फ्लो कम होता है और लाइट का अब्जॉर्प्शन भी कम हो जाता है। सॉफ्टवेयर इन बदलावों को पकड़कर आपकी हार्ट रेट स्क्रीन पर दिखाता है।
बीमारी का अंदाजा भी लग सकता है
कई कंपनियां अब एडवांस एल्गोरिद्म का इस्तेमाल कर रही हैं, जिससे पल्स रेट देखकर कुछ बीमारियों का अंदाजा लगाया जा सकता है। हालांकि, यह पूरी तरह सटीक नहीं होता। इसलिए नियमित हेल्थ चेकअप कराना जरूरी है।
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