Last Updated Jan - 09 - 2026, 01:27 PM | Source : Fela News
Gmail यूजर्स की प्राइवेसी पर सवाल उठे हैं। दावा है कि AI ट्रेनिंग के लिए ईमेल डेटा एक्सेस हो सकता है। जानिए कौन-सी दो सेटिंग्स तुरंत बंद करनी चाहिए।
दुनियाभर में करोड़ों लोग रोजाना Google की ईमेल सर्विस Gmail का इस्तेमाल करते हैं। बैंकिंग अलर्ट से लेकर निजी बातचीत और जरूरी डॉक्युमेंट्स तक —सब कुछ Gmail के जरिए ही संभाला जाता है। लेकिन अब Gmail यूजर्स की प्राइवेसी को लेकर एक नया विवाद सामने आया है, जिसने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
हाल ही में एक टेक यूट्यूबर और इंजीनियरिंग एक्सपर्ट Devery Jones ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया कि Gmail में मौजूद कुछ डिफॉल्ट सेटिंग्स की वजह से यूजर्स का ईमेल डेटा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिस्टम तक पहुंच सकता है। उनका कहना है कि कई यूजर्स अनजाने में ही ऐसी शर्तों को स्वीकार कर चुके हैं, जिनके तहत ईमेल कंटेंट Al मॉडल को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल हो सकता है।
दरअसल, Gmail में कुछ एडवांस फीचर्स पहले से ही एक्टिव रहते हैं। इनमें स्मार्ट कंपोज, स्मार्ट रिप्लाई और AI-बेस्ड सर्च जैसे टूल
शामिल हैं। ये सुविधाएं यूजर्स का अनुभव बेहतर बनाने के लिए बनाई गई हैं, लेकिन इन्हीं के जरिए ईमेल का कंटेंट प्रोसेस किया जाता है। यही बात प्राइवेसी को लेकर सवाल खड़े कर रही है।
टेक जानकारों के मुताबिक, चिंता की सबसे बड़ी वजह यह है कि कई यूजर्स को यह साफ-साफ पता नहीं होता कि कौन-सी सेटिंग्स उनका डेटा प्रोसेस कर रही हैं। अगर यूजर खुद जाकर इन ऑप्शन्स को बंद नहीं करते, तो ईमेल, अटैचमेंट्स और कुछ हद तक मेटाडेटा का इस्तेमाल AI सिस्टम के लिए जारी रह सकता है।
हालांकि, Google की ओर से पहले भी यह कहा जाता रहा है कि यूजर्स का डेटा सुरक्षित रखा जाता है और उसका गलत इस्तेमाल नहीं किया जाता। कंपनी का दावा है कि AI फीचर्स का मकसद सिर्फ बेहतर सेवा देना है, न कि किसी की निजी जानकारी लीक करना। इसके बावजूद, प्राइवेसी एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यूजर्स को अपनी सेटिंग्स को लेकर ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है।
अगर आप Gmail यूजर हैं, तो सबसे पहले अपने अकाउंट की प्राइवेसी और डेटा सेटिंग्स जरूर चेक करें। खासतौर पर AI-आधारित फीचर्स और डेटा शेयरिंग से जुड़ी सेटिंग्स को समझना जरूरी है। जरूरत न हो तो इन्हें बंद करना एक सुरक्षित कदम माना जा रहा है।
Gmail पूरी तरह असुरक्षित नहीं है, लेकिन डिजिटल दौर में "डिफॉल्ट सेटिंग्स" पर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है। थोड़ी सी जागरूकता और सही सेटिंग्स आपको अपनी प्राइवेसी लीक होने से बचा सकती हैं।
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