Last Updated Jan - 10 - 2026, 12:42 PM | Source : Fela News
वास्तु के अनुसार बाथरूम में लगा शीशा धन हानि, तनाव और सेहत से जुड़ी समस्याओं का कारण बन सकता है।
घर बनाते वक्त बाथरूम में शीशा लगाना आजकल आम बात है, लेकिन वास्तु शास्त्र इसे लेकर सावधानी बरतने की सलाह देता है। माना जाता है कि बाथरूम का शीशा अगर गलत जगह या गलत तरीके से लगाया जाए, तो इसका असर सिर्फ घर की ऊर्जा पर नहीं बल्कि व्यक्ति की सेहत और आर्थिक स्थिति पर भी पड़ सकता है।
वास्तु के अनुसार बाथरूम नकारात्मक ऊर्जा का स्थान माना जाता है। ऐसे में यहां लगा शीशा उस ऊर्जा को कई गुना बढ़ा सकता है। खासकर अगर शीशा सीधे टॉयलेट सीट के सामने लगा हो, तो इसे अशुभ माना जाता है। कहा जाता है कि ऐसा शीशा धन हानि, मानसिक तनाव और बार-बार बीमार पड़ने की वजह बन सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, बाथरूम में शीशा उत्तर या पूर्व दिशा की दीवार पर लगाना बेहतर माना जाता है। इससे नकारात्मक प्रभाव कम होता है और घर की ऊर्जा संतुलित रहती है। दक्षिण या पश्चिम दिशा में लगा शीशा वास्तु दोष पैदा कर सकता है, जिससे घर के सदस्यों के बीच तनाव बढ़ सकता है।
एक और बड़ी गलती जो लोग अक्सर करते हैं, वह है टूटे या धुंधले शीशे का इस्तेमाल। वास्तु शास्त्र में टूटे शीशे को बहुत अशुभ माना गया है। ऐसा शीशा न केवल नकारात्मकता फैलाता है, बल्कि आत्मविश्वास में कमी और निर्णय लेने की क्षमता पर भी असर डाल सकता है। अगर शीशे पर दरार या दाग हैं, तो उसे तुरंत बदल देना चाहिए।
बाथरूम का शीशा हमेशा साफ और चमकदार होना चाहिए। गंदा या धुंधला शीशा जीवन में रुकावट और भ्रम का संकेत माना जाता है। साथ ही यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि शीशा इतना बड़ा न हो कि उसमें पूरा बाथरूम या टॉयलेट साफ दिखाई दे।
कुछ वास्तु जानकार यह भी मानते हैं कि अगर बाथरूम का दरवाजा खुलते ही शीशा नजर आता है, तो यह शुभ नहीं होता। ऐसी स्थिति में शीशे को ढकने या उसकी दिशा बदलने की सलाह दी जाती है।
कुल मिलाकर, बाथरूम में शीशा लगाना गलत नहीं है, लेकिन उसकी जगह और स्थिति बेहद अहम है। सही दिशा और साफ-सुथरा शीशा जहां घर में संतुलन बनाए रखता है, वहीं गलत जगह लगा शीशा धीरे-धीरे परेशानियों की वजह बन सकता है। इसलिए बेहतर यही है कि शीशा लगाते वक्त वास्तु नियमों का ध्यान रखा जाए, ताकि घर की ऊर्जा सकारात्मक बनी रहे।