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अमेरिका से चीन तक, कैसे बनता है दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं का बजट

अमेरिका से चीन तक, कैसे बनता है दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं का बजट

Last Updated Jan - 31 - 2026, 03:25 PM | Source : Fela News

भारत में बजट पर जितनी नजर रहती है, उतनी ही अहम विदेशों की बजट रणनीति भी है। जानिए अमेरिका, चीन और जापान जैसे देशों का खर्च फोकस और भारत के लिए सबक
अमेरिका से चीन तक
अमेरिका से चीन तक

भारत में बजट का नाम आते ही सबसे पहला सवाल यही होता है कि टैक्स में राहत मिलेगी या नहीं, किसानों और नौकरीपेशा वर्ग को क्या मिलेगा और महंगाई पर कितना काबू रहेगा। लेकिन क्या दुनिया के दूसरे देशों में भी बजट को इसी नजर से देखा जाता है? अमेरिका से लेकर चीन, जापान और यूरोप तक की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में बजट का मकसद सिर्फ राहत देना नहीं, बल्कि वैश्विक ताकत बनाए रखना भी होता है। 

अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और उसका बजट भी सबसे विशाल होता है। अमेरिकी सरकार का बड़ा खर्च सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर जाता है, जैसे पेंशन और हेल्थ इंश्योरेंस। इसके अलावा रक्षा बजट अमेरिका की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल रहता है। सैन्य ताकत, मिसाइल डिफेंस सिस्टम, साइबर सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में प्रभाव बनाए रखने पर अरबों डॉलर खर्च किए जाते हैं। दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका अब अपने बजट का बड़ा हिस्सा पुराने कर्ज के ब्याज चुकाने में भी खर्च कर रहा है, जो उसकी सबसे बड़ी आर्थिक चुनौती बन चुका है। 

दूसरी ओर चीन का बजट बिल्कुल अलग सोच के साथ तैयार किया जाता है। चीन का फोकस आत्मनिर्भरता, तकनीक और इंडस्ट्रियल ग्रोथ पर रहता है। वह बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे, हाई स्पीड रेल, ग्रीन एनर्जी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में निवेश करता है। चीन मानता है कि तकनीक और उत्पादन क्षमता बढ़ाकर ही वह अमेरिका जैसी ताकतों से मुकाबला कर सकता है। इसलिए रिसर्च, सेमीकंडक्टर और स्पेस टेक्नोलॉजी पर चीन का खर्च लगातार बढ़ रहा है। 

जापान का बजट एक अलग ही चुनौती को दर्शाता है। वहां आबादी तेजी से बूढ़ी हो रही है, जिससे पेंशन और हेल्थकेयर पर भारी खर्च करना पड़ता है। साथ ही, चीन और उत्तर कोरिया से बढ़ते खतरे के कारण जापान ने हाल के वर्षों में अपने रक्षा बजट में रिकॉर्ड बढ़ोतरी की है। शांतिवादी छवि वाले देश के लिए यह एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। हालांकि, जापान के बजट का बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने में भी चला जाता है, जो उसकी अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाता है। 

यूरोपीय देशों जैसे फ्रांस और ब्रिटेन का बजट सामाजिक कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य और जलवायु परिवर्तन पर ज्यादा केंद्रित रहता है। वहां सरकारें जनता को मजबूत सामाजिक सुरक्षा देने को प्राथमिकता देती हैं, भले ही इसके लिए टैक्स ज्यादा क्यों न वसूलना पड़े। 

इन सभी उदाहरणों से भारत के लिए एक अहम सीख निकलती है। भारत को अपने बजट में विकास, सामाजिक सुरक्षा और रक्षा - तीनों के बीच संतुलन बनाना होगा। कर्ज पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता से बचना, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना और टेक्नोलॉजी में निवेश करना भारत के लिए जरूरी है। दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं यही दिखाती हैं कि बजट सिर्फ खर्च का दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की दीर्घकालीन रणनीति का आईना होता है।

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