Last Updated Aug - 23 - 2025, 02:45 PM | Source : Fela News
गंभीर घटनाक्रम में, सीबीआई ने अनिल अंबानी से जुड़ी संस्थाओं में बड़े पैमाने पर कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में छापेमारी की और एफआईआर दर्ज की है।
23 अगस्त 2025 को कारोबारी जगत में हलचल मच गई, जब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) और उसके प्रमोटर डायरेक्टर अनिल अंबानी से जुड़ी संपत्तियों पर छापेमारी की और एफआईआर दर्ज की। सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई बड़े पैमाने पर कथित बैंक धोखाधड़ी की जांच का हिस्सा है, जिसे पहले से समझी गई वित्तीय अनियमितताओं से कहीं अधिक गंभीर माना जा रहा है।
नई दिल्ली स्थित अधिकारियों ने बताया कि यह कदम जांच के बढ़ते दायरे का हिस्सा है, जिसमें केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के साथ प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी शामिल है। दोनों एजेंसियां करीब ₹17,000 करोड़ के बकाया कर्ज और संदिग्ध फंड डायवर्जन पर नजर रख रही हैं। यह मामला न सिर्फ यस बैंक लोन ग्रुप से जुड़ा है, जिसमें 2017 से 2019 के बीच अंबानी ग्रुप की कंपनियों को दिए गए लगभग ₹3,000 करोड़ के लोन की गहन जांच हो रही है, बल्कि इसमें कथित मनी लॉन्ड्रिंग स्कीम्स भी शामिल हैं। इनमें फर्जी बैंक गारंटी, शेल कंपनियों और फंड हेराफेरी जैसी गतिविधियां शामिल हैं। खासतौर पर एक बड़ा खुलासा ₹68–69 करोड़ की फर्जी बैंक गारंटी से जुड़ा है, जो बिस्वाल ट्रेडलिंक प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से जारी की गई थी। बताया जा रहा है कि इस कंपनी को रिलायंस पावर से फंड मिले थे, जिससे गंभीर धोखाधड़ी के संकेत मिले।
हालांकि पूरी जांच का दायरा अभी सामने नहीं आया है, लेकिन इन दबावपूर्ण कार्रवाइयों से साफ है कि रिलायंस ग्रुप की कई कंपनियां बढ़ती कानूनी चुनौतियों और कड़े निगरानी तंत्र के दायरे में आ गई हैं। CBI और ED की संयुक्त कार्रवाई जवाबदेही की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिसने भारत के बड़े औद्योगिक घरानों में कॉर्पोरेट गवर्नेंस, बैंक निगरानी और नियामकीय प्रवर्तन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जैसे-जैसे मामला आगे बढ़ रहा है, पूरे देश और कॉर्पोरेट बोर्डरूम्स की नजर इस पर टिकी है कि यह हाई-प्रोफाइल जांच भारतीय कॉर्पोरेट जगत में जवाबदेही के ढांचे को किस तरह बदलती है।