Last Updated Jan - 24 - 2026, 04:16 PM | Source : Fela News
पांच दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग को लेकर बैंक कर्मचारी 27 जनवरी को हड़ताल पर जा सकते हैं, जिससे तीन दिनों तक बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहने की संभावना है।
देशभर के बैंक कर्मचारियों के 27 जनवरी को हड़ताल पर जाने की संभावना जताई जा रही है। बैंक यूनियनों का कहना है कि लंबे समय से लंबित पांच दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग को लेकर सरकार और बैंक प्रबंधन की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इसी के विरोध में कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन का रास्ता अपनाने की चेतावनी दी है। सूत्रों के अनुसार, यदि हड़ताल होती है तो इसका असर लगातार तीन दिनों तक बैंकिंग सेवाओं पर पड़ सकता है।
बताया जा रहा है कि 27 जनवरी को प्रस्तावित हड़ताल के बाद कुछ क्षेत्रों में पहले से तय अवकाश भी पड़ सकता है, जिससे बैंकों का कामकाज कई दिनों तक बाधित रहने की आशंका है। बैंक यूनियनों का कहना है कि अन्य सरकारी और निजी क्षेत्रों में पांच दिवसीय कार्य प्रणाली लागू है, जबकि बैंक कर्मचारी अभी भी छह दिन काम करने को मजबूर हैं। उनका तर्क है कि बढ़ते काम के दबाव और कर्मचारियों की कमी को देखते हुए कार्य सप्ताह में बदलाव जरूरी हो गया है।
इस बीच, यूनियनों ने यह भी स्पष्ट किया है कि उनकी मांग केवल कार्य सप्ताह तक सीमित नहीं है। सूत्रों के अनुसार, वे भर्ती प्रक्रिया में तेजी, प्रमोशन से जुड़े मुद्दों और कर्मचारियों की सुरक्षा से संबंधित मांगों को भी उठा रहे हैं। हालांकि, मौजूदा हड़ताल की मुख्य वजह पांच दिवसीय कार्य सप्ताह को ही बताया जा रहा है।
वहीं दूसरी ओर, बैंक प्रबंधन और सरकार की ओर से अब तक कोई अंतिम बयान सामने नहीं आया है। प्रशासन का कहना है कि यूनियनों के साथ बातचीत का विकल्प खुला है और समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या हड़ताल से पहले कोई सहमति बन पाएगी या नहीं।
हड़ताल की स्थिति में नकद निकासी, चेक क्लीयरेंस, शाखाओं में लेनदेन और अन्य नियमित बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि, डिजिटल बैंकिंग सेवाएं जैसे एटीएम, यूपीआई और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन सामान्य रूप से चालू रहने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन तकनीकी या लोड से जुड़ी दिक्कतों से इनकार नहीं किया जा सकता।
इस बीच, ग्राहकों को सलाह दी जा रही है कि वे जरूरी बैंकिंग काम पहले ही निपटा लें। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थितियों में आम लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ता है, इसलिए समय रहते तैयारी करना बेहतर होता है। फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि 27 जनवरी से पहले सरकार और बैंक यूनियनों के बीच कोई समाधान निकलता है या नहीं।
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